साथियों जोहार
छत्तीसगढ़ में सिनेमा पिक पर है, धड़ाधड़ फिल्में बन रहीं हैं फिल्में काफी अच्छी हैं पर दर्शक नही मिल रहें!
क्या कारण हो सकता है?
इस विषय पर सिनेमा के साथियों को चिंतन करने की जरूरत है…
हमारे प्रदेश में भाषाई अस्मिता हाशिए पर है, छत्तीसगढ़ी फिल्में लोग क्यों देखें जब उनके बच्चे इंग्लिश स्कूलों में पढ़ते हैं जहां छत्तीसगढ़ी बोलना ही मना है और हम आप भी अपने घरों में परिवार के साथ बहुत कम या ना के बराबर छत्तीसगढ़ी बोलते हैं?
हमारी फिल्मों की मेकिंग काफी हद तक सुधरी है अब भाषाई अस्मिता के लिए काम करने की जरूरत है जिसके लिए तमाम साथियों को जो सिनेमा और सांस्कृतिक कार्यों से जुड़े हैं सबको एक मंच पर आना होगा…
यकीनन हमारी छत्तीसगढ़ी सिनेमा एक दिन विश्व में जानी पहचानी और मानी जाएगी
आप सभी साथियों को जो किसी न किसी रूप में सिनेमा से जुड़े हैं उन सबकी महती भूमिका ने ही यह विशेषता पैदा की है बस एक कदम भाषाई अस्मिता, लोगों के अंतर्मन में जगाने की आखरी कील मारनी है जिसके लिए हमें वैचारिक रूप से एक होना होगा….
राजभाषा छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने बड़े आंदोलन की रूपरेखा आइए मिलकर बनाएं…
गजेंद्ररथ गर्व, फिल्म लेखक FTII
प्रदेश अध्यक्ष- छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ
प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ फिल्म एसोसियेशन
9827909433
