सरकार की सारी अच्छाइयों पर सिर्फ एक बुराई भारी!

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सरकार की सारी अच्छाइयों पर सिर्फ एक बुराई भारी!

भारतीय जनता पार्टी अपने प्रधानसेवक का सबसे लंबा सेवा काल सेलिब्रेट कर रही है, उपलब्धियां बहुत है, कश्मीर 370, राम मंदिर, यूपी में कानून कायम और देशभर में सुशासन!
शुरू में मैं खुद भी व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रसंशक रहा हूं लेकिन देश के हालातों और विदेश नीतियों की सच्चाई ने मुझे बदल दिया!
पार्टी ने एक काम बखूबी किया, तमाम ऐसे लोगों को अपने पाले में ले लिया जिनसे पार्टी को ज़रा भी खतरा दिखा!
अब ऐसा कहना गलत न होगा की जितने लोग अन्य पार्टियों से बीजेपी में शामिल हुए हैं और उन्हें पार्टी ने जो ऊंचाइयां दी है काबिले तारीफ़ है, जो कभी विपक्ष में रहकर बीजेपी पर निशाना साधते दिखे आज वही बीजेपी के मुख्यमंत्री बने बैठे हैं यह डीप्लोमेशी देश के लिए बड़ा उदाहरण है और दूसरी बात पार्टी ने बूथ स्तर से जो गणित बिठाया है, आने वाले कई कई साल बीजेपी को सत्ता से उखाड़ना टेड़ी खीर है!
देश की पहली पार्टी कांग्रेस की यही सबसे बड़ी कमजोरी है, हवाहवाई होना, जनता तक पहुंचने से पहले ही अपना हिस्सा अलग कर लेना इस पॉलिसी से अलग बीजेपी ने नया पैंतरा अपनाया, कॉरपोरेट्स को चंदा के जाल में फांस लिया और देखते ही देखते देश और दुनिया की सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी बन गई।
बीजेपी चाहे तो अब अपने कार्यकर्ताओं को काम के बदले सैलेरी भी दे सकती है इतना धन पार्टी के पास इकठ्ठा है और हंसी की बात यही पार्टी आम जनता को कई तरह के फंड्स में दान करने कहती है, असल में यह उन व्यापारियों के लिए कहती है जो सत्ता से पोषित होते हैं तो कमीशन भी बनता है जिसे वैध रूप में राजनीतिक पार्टियां चंदा के बहाने लेते हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने यकीनन राजनीति को नया आयाम दिया है, सत्ता कॉरपोरेट और प्रशासनिक तंत्र का जो कॉकटेल इस सरकार में दिखता है उतने खुलेपन से इसके पहले नही देखा गया।
आपको याद होगा BSNL का बंद होना, jio का मार्केट पर कब्जा और कई तरह के उदाहरण हैं!
जनता को मूलभूत जरूरतों के लिए अब भारी टैक्स देना पड़ता है यही कॉरपोरेट की चाल है, सत्ता का व्यापारीकरण इस सरकार की उपलब्धि है।

अदानी का व्यापार और उसे सरकार का सहकार!
केंद्र और राज्य सरकारों खास कर छत्तीसगढ़ के लिए व्यवहार साफ दिखता है, प्राकृतिक संसाधनों से युक्त छत्तीसगढ़ में एक लंबी लड़ाई यहां के जंगलों के लिए लड़ी जा रही है, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, सर्व आदिवासी सेना, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन जैसे तमाम गैर राजनीतिक संगठन अपनी धरती को बचाने लंबे समय से जुटे हुए हैं पर आज तक उन्हें सफलता नहीं मिली क्योंकि इन आंदोलनों को भी कथित बीजेपी और कॉरपोरेट घरानों से सहायता मिलती रही है, इन आंदोलनों के बहाने ऐसे लोग जो आदिवासियों के हितैषी होने का दिखावा कर सत्ता के लिए ट्रेडिंग कर रहे हैं उन्हें भी चिन्हा जाना जरूरी है।
विपक्षी दल कांग्रेस का स्टैंड भी बीजेपी के खिलाफ कुछ खास नहीं है, कहीं कहीं दोनों पार्टियां एक दूसरे की सहायक दिखती हैं जब संसाधनों की लूट का मामला हो।

छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही ऐसी लूट मचाई की अब तो आखरी है और शायद कांग्रेस का आखरी ही था, अब आखिर कैसे भरोसा करेगी जनता उन पर, किस बात का भरोसा करेगी?
बीजेपी ने जो कीर्तिमान स्थापित किए उस पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट का कृत्य भारी पड़ रहा है, देश भर में चाहे अरावली, हसदेव, तमनार, बस्तर सभी जगह जनता ने मोर्चा खोला है और देश यह सब देख रहा है की किस तरह सरकार अपने कॉरपोरेट साथियों के लिए प्रकृति की हत्या करने से नहीं चूक रही!
ऐसे में पार्टी सरकार की सारी अच्छाइयां सिर्फ एक बुराई के नीचे दबी हुई दिख रही है।
सच तो यह भी है की अगर बीजेपी धर्म और धार्मिकता को सही दिशा में मोड़ दे, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर लगाम लगाए तो यह पार्टी ही देश को नेक्ट लेवल पर पहुंचाने का माद्दा रखने वाला 56 इंची छाती पार्टी है।

गजेंद्ररथ गर्व, संपादक- प्रदेशवाद
प्रदेश अध्यक्ष -छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़ 9827909433

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