राजनीति की अंगड़ाई लेता छत्तीसगढ़!
छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित अग्निकांड मामले में जेल काट रहे प्रदेश की नई राजनीतिक पार्टी जोहार छत्तीसगढ़ के मुखिया अमित बघेल सहयोगी अजय यादव और दिनेश वर्मा एक दिन आगे पीछे जेल से जमानत पर रिहा हुए हैं, कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया और यह संदेश देने की कोशिश भी की यह प्रादेशिक दल सिर्फ चिल्ला चोंट नही करेगा बल्कि सत्ता तक पहुंचने ऐड़ी चोटी लगाएगा।
गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जन्मी जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एक विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है और अपना नाम कम से कम लोगों की जुबान तक लाने में सफल हुई है लेकिन मूलरूप से यह पार्टी गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बिना अधूरी है और जनता को राजनीतिक दल से ज्यादा गैर राजनीतिक संगठन में दिलचस्पी है भले ही पार्टी कार्यकर्ता भरकस प्रयास राजनीति में सफल होने के लिए कर रहे हैं।
बड़ी बात यह भी की लगातार JCP से स्थानीय जनप्रतिनिधि जिन्हे उनकी पार्टी अनदेखा करती है वे जुड़ते जा रहे हैं और कारवां बढ़ रहा है।
मुख्यतः माटीवाद को ध्येय बना कर मैदान में आई CKS बार बार भटकती रही है सत्तासीन पार्टियों से ठुकराए लोगों ने हमेशा CKS को अपने तरीके से चलाने का प्रयास किया पर सफल न हुए, इस क्रम में बीजेपी, कांग्रेस के मुख्यधारा से हटाए गए नेताओं की फेहरिस्त लंबी है।
अमित बघेल बीते कुछ वर्षों में महतारी वाद का बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं, लोगों को उम्मीद है की ये नेता उनका भला कर पाएंगे!
बेबाकी, क्रांतिकारी तेवर और गुर्राटे दार आवाज ने युवावर्ग को अमित बघेल का दीवाना बना दिया है खास कर वे युवा जो पढ़ाई लिखाई पूरी कर जिंदगी की जद्दोजहद में शामिल हुए हैं, कारखानों में काम कर रहे हैं पीड़ित शोषित हैं ऐसे कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज JCP और CKS में मौजूद है, जायज है छत्तीसगढ़ पृथक राज्य मिलने के बाद जिस तेजी से इस धनी धरती को लूटा गया और स्थानीयता की अनदेखी की गई बस इसी का परिणाम है क्रांतिसेना!
लंबे समय से सेना प्रादेशिकता और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए लड़ रही है, इस माटी को महतारी मान कर पुरखों ने जो सपने देखें हैं वही पूरा करने युवा लगातार प्रयासरत हैं और अब राजनीतिक दल JCP स्थानीय युवाओं को राजनीति में मजबूत करने की गरज से सक्रिय है और सफल होती भी दिख रही है।
गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी अपने उद्देश्यों पर काम कर ही रही है, छत्तीसगढ़िया प्रथम का मूलमंत्र इंजन का ईंधन बना हुआ है और आगे बड़े बड़े प्रतिमान स्थापित करने संगठन तैयार है।
इस बार बीजेपी की सरकार बनते ही प्रदेश के इतिहास में कभी न हुआ, वो हो गया।
बलौदा बाजार अग्निकांड ने देश और दुनिया भर में छत्तीसगढ़ शब्द को जनवा दिया, सतनामी समाज के इष्ट और आस्था पर चोंट की प्रतिक्रिया ने ऐतिहासिक विध्वंस का दंश दिया, समाज के सैकड़ों युवा जेल गए, प्रताड़ित हुए और लंबे अंतराल के बाद अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा भी फांसे गए, दरअसल सरकार ने उन्हें इस लिए घेरा क्योंकि ये राजधानी में छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति खंडित होने पर बवाल मचाए हुए थे, पहला केस तो यही लगा था हेट स्पीच का फिर गिरफ्तारी के बाद बलौदा बाजार अग्निकांड उड़ेला गया शायद इसलिए इस मामले में सतनामी समाज के युवाओं से ज्यादा चर्चा अमित बघेल की गिरफ्तारी की रही, ऐसा नहीं था की CKS से यह पहली गिरफ्तारी थी इससे पहले दूसरे धड़े के CKS प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता दिलीप मिरी लंबी जेल यात्रा बलौदा बाजार अग्निकांड मामले में कर चुके थे।
प्रदेश की राजनीति में JCP छत्तीसगढ़ियों की नई उम्मीद!
गैर राजनीतिक संगठन के रूप में काम करते संगठन की पॉलिटिकल विंग के रूप में JCP से लोगों की भारी उम्मीद है और यही जेसीपी की ताकत है लेकिन चुनौती भी, क्योंकि पार्टी अभी भी लकीर पर चल रही है, सिस्टम जनरेट नही हुए, कहे सुने पर काम करने का फल कार्यकर्ता देख ही रहे हैं, भीड़ को जतन की और उद्देश्य के लिए मार्गदर्शन की जरूरत होती है जिसकी कमी नजर आ रही है!
सिर्फ महतारी वाद के साथ सत्ता तक पहुंच मुमकिन नहीं है, अपने उद्देश्यों और लक्ष्यों को भी जमीनी हकीकत से रूबरू कराना जरूरी है।
जनता को विश्वसनीय चेहरा उस चेहरे की योग्यता के साथ चाहिए, क्या वह चेहरा अमित बघेल बन पाएंगे?
क्या अमित बघेल को अपने तेवर के साथ सामाजिक सम्मान और मर्यादा का मिश्रण करना चाहिए?
आप भी अपनी राय दें…

आलेख: गजेंद्ररथ गर्व, संपादक – प्रदेशवाद, प्रदेश अध्यक्ष – छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़
