गाय मारकर जूता दान जैसे ही शराब बेचकर महतारी वंदन!
अंबिकापुर के दरिमा में शराब ठेके को अन्यत्र स्थानांतरित करने या बंद करने की मांग लेकर कलेक्टर के पास जनदर्शन में पहुंचे महिला समूह को कलेक्टर ने अटपटा सवाल पूछ लिया, आप लोगों को महतारी वंदन के एक हजार मिल रहे हैं न?
महिलाओं ने कहा, हां! फिर कलेक्टर साहब बताने लगे की शराब बेचना भी सरकार की योजना है।
यानी साहब अहसान जता रहे हैं सरकार की ओर से, अगर महतारी वंदन के एक हजार रुपए हर माह चाहिए तो शराब बिक्री का विरोध क्यों?
इस पर महिलाएं बफल गई, तो साहब हम अपने नौजवान परिवारों को शराब में डूबने की शर्त पर महतारी वंदन ले रहे हैं? तब तो हमें नही चाहिए आपकी सरकार के हजार रुपए!

बीजेपी की सरकार बनने में महतारी वंदन योजना को ही मास्टर स्ट्रोक कहा जाता रहा है और शायद है भी!
तब किसी ने पूछा था महिलाओं को इतना पैसा देने के लिए फंड कहां से आएगा उस वक्त किसी को क्या पड़ी थी फंड संड की सोंचे पर अब जब सरकार खुलकर कह रही है की महतारी वंदन के एक हजार देने के लिए उन्हें मजबूरी में शराब दुकानों की संख्या बढ़ानी पड़ रही है तब बात कुछ गाय मार कर जूता दान वाली कहावत पर आकर अटक रही है?
अंबिकापुर में यह बात प्रशासन के सबसे बड़े अफसर जिन्हें हम जिलाधीश कहते हैं ने कही है यानी सिस्टम चलाने वालों पर ही सरकार ने अपनी मनमानी गारंटी का भार डाल रखा है?
तभी तो साहब कह रहे हैं, शराब के पैसों से ही महतारी वंदन योजना संचालित है?
साहब की बात ने महिलाओं के दिमाग की बत्ती जला दी है, उन्हें बिना समझाए समझ आ रहा है की उनके घरों में कलह का कारण उन्हें मिलने वाली महतारी वंदन ही है, न नौ मन तेल होता न मीरा नाचती, न माताएं एक हजार के लालच में पड़ती न घर के नौजवान शराबी होते?
तात्पर्य, क्या सरकारों की गारंटी हमारे ही खाल उधेड़ हमें ही चादर बांटने की होती हैं, तो यह सच है, चुनाव जीतने के लालच में पार्टियों के वादे लालची जनता को ही भारी पड़ते हैं, यह छत्तीसगढ़ में चरितार्थ हो रहा है।
स्कूलों को बंद किया गया, शराब दुकानें बढ़ाई गई इससे आप क्या सोचते हैं की सरकार आपके बच्चों का भविष्य बनाना चाहती है या उन्हें अनपढ़ और शराबी बनाकर सत्ता से सवाल न करने वाली नकारा जनता बनाना चाहती है?
धर्म, मंदिर और हिंदुत्व हमारी आस्था है जिसे हमने किसी पार्टी विशेष पर टिका रखा है, ठीक रेगिस्तान की मरीचिका जैसी जो दूर से पानी तो दिखती पर पास जाते ही भ्रम का ज्ञान कराती है, अब यह भ्रम ज्ञान प्यासी जनता को कब होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा पर तब तक न जाने कितने घर शराब के नशे में विचलित होकर टूट चुके होंगे।
सच तो है न? आपको सरकार पैसे कैसे देगी, आपसे ही लेकर न? वही तो कर रही है, अब आप हम इस बात को समझ नही रहें या समझना नही चाहते यह हमारी मनोदशा पर निर्भर करती है।
पर यहां एक बात तो है, प्रदेश की मातृ शक्ति जाग चुकी है, जिन छत्तीसगढ़ महतारी ने छाती ठोक कर कहा न की हम अपने पति, बेटों की लाश पर महतारी वंदन का एक हजार नही लेना चाहते तो अब यह शुरुआत है उलगुलान की अब आगे आगे देखिए होता है क्या?
आलेख: गजेंद्ररथ गर्व, संपादक प्रदेशवाद, प्रदेश अध्यक्ष – छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ 9827909433
