एक अपील जंगलों को बचाने की भी कर देते मोदी जी: गजेंद्ररथ गर्व

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एक अपील जंगलों को बचाने की भी कर देते मोदी जी: गजेंद्ररथ गर्व

देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात अपील प्रचारित हो रही हैं, नेता मंत्री, जनता, कॉरपोरेट सभी अनुसरण करने में प्रतियोगिता खेल रहे हैं!
एक साल तक सोना न खरीदें, विदेश यात्रा न जाएं, ईधन बचाएं और भी कई अपील, जिसके बाद से सोशल मीडिया में दिखावे की बाढ़ सी आ गई है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता, मंत्री, कार्यकर्ता तो बकायदा इसका बैनर पोस्टर लगाए पड़े हैं, मानो मोदी जी की अपील के पहले तक उन्हें इन सब बातों का ज्ञान ही नही था?

कोई सायकल से संसद जा रहा, कहीं अफसर स्कूटी से ऑफिस जा रहें तो कहीं मंत्री अपना पायलट वाहन कम करने के बाद सोशल मीडिया में बकायदा इसकी जानकारी देकर जनता पर अहसान जता रहें हैं?

जी हां! देश में संकट आने वाला है और जिस वजह से संकट आने वाला है उसे बचाने की बात कोई नहीं कर रहा?
देश भर में जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नेचरल रिसोर्सेज का भयंकर दोहन और खेती जमीनों का औद्योगिकीकरण!
इन पर कोई अपील क्यों नही करता?

तेल बड़ा संकट नही है आने वाले दिनों में पर्यावरण बड़ा संकट बनने वाला है, यह बात सबको समझ भी आती है पर इसके लिए हमें हमारे प्रधानमंत्री जी ने अभी तक जन अपील नही की, तो जनता को भी क्या करना?
जब PM साब बताएंगे की किसका संरक्षण करना है और किसका नही तब जाकर कठपुतली जनता हरकत में आएगी?
अरावली से लेकर छत्तीसगढ़ के हसदेव, तमनार और अब बस्तर के वन भयंकर औद्योगिकीकरण की चपेट में है, हसदेव अरण्य तो अब पूरी तरह कोयले की खान में तब्दील की जा चुकी है!
लाखों नही करोड़ों की संख्या में पेड़ काट कर जंगलों को बंजर कर दिया गया है।
आप सोचिए अभी एक दिन पेट्रोल डीजल के लिए आप इतना घबरा गए, जब आपकी सांसे अटकनी शुरू होंगी तब क्या करोगे, कहां भागोगे?

ऑक्सीजन की थैली बेचने वाली परीकथा सच होने वाली है!
बाजारवाद ने सबसे पहला वार मानवता, प्रेम और संवेदनाओं पर किया है।
अब सब बिकता है, सम्मान, परोपकार, व्यक्तित्व बिल्डप करने ऑनलाइन बाजार सजा है, पैसे हैं खरीद लो, झूठ और फरेब में जो जितना आगे अब वही बड़ा खिलाड़ी?

हमारी नश्लें कमजोर हो रही हैं क्योंकि अब वैचारिकता मार दी गई है।
बाजारवाद की बलि चढ़ चुकी दुनिया में अब इंसानियत का नाम लेना भी पाप हो गया है?

सब कुछ मार्केटिंग!
आप देखिए कितने सालों से हसदेव जंगल खत्म हो रहे हैं पर आज तक जनता इतनी तन्मयता से उस ओर नही हुई है पर अचानक ईंधन बचाने की होड़?
यानी हमने तय कर लिया है, जिंदगी से कीमती, घूमना फिरना, सोना खरीदना, तेल खाना और न जाने क्या क्या?
तभी तो आज जब प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर कोई अपील नही करता?
सबको सब पता है फिर भी इतना सन्नाटा क्यों है भाई?

: गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेश अध्यक्ष
छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़
प्रदेश प्रवक्ता गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, 9827909433

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