रायपुर: राजधानी के खरोरा तहसील क्षेत्र में खनन माफियाओं का जाल बिछा हुआ है, इस क्षेत्र में लाइम स्टोन क्रेशर खदानों का संचालन रसूखदार व्यापारी लगातार नियमों की अनदेखी करते जारी रखे हुए हैं!
क्षेत्र के मुरा गांव तो लगभग खदान की गोद में ही बसा हुआ है, कभी खेती के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाला मुरा गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लखन लाल मिश्रा जी का गृह ग्राम है जहां एक बड़े जलाशय जिसका नामकरण भी स्व. लखन लाल मिश्रा जी के नाम पर हुआ है, यह कृषि प्रधान क्षेत्र में सिंचाई का बड़ा जरिया है लेकिन पत्थर खदानों में हो रहे लगातार बेतरतीब ब्लास्टिंग और अवैध खनन के चलते अब यहां के ग्रामीण खेती से दूर हो रहे हैं।

बीते दिनों कुछ लाइम स्टोन क्रेशर खदानों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पर्यावरण संरक्षण विभाग ने इस क्षेत्र में खनन को गैर वाजिब बताया है और पर्यावरण के लिहाज से बहुत ही खतरनाक करार दिया है साथ ही कुछ क्रेशर खदानों में छापे मार कार्रवाई कर बंद करने के साथ स्पेशल SIT गठित कर संचालित खदानों की जांच के लिए लिखा है।
बताया जा रहा है की लगातार ब्लास्टिंग और अंधाधुंध खनन के चलते ग्रामीण बहुत परेशान हैं और सरकार के कई फोरम में शिकायत कर थक चुके हैं। पहली बार कलेक्टर जनदर्शन की शिकायत पर पर्यावरण संरक्षण विभाग ने इस क्षेत्र में कार्रवाई की और कई खामियां पाई है।

खनिज विभाग पर भी बड़ा आरोप है की रसूखदार खनन माफियाओं को अधिकारियों ने छूट दे रखा है जिसके चलते बेखौफ ब्लास्टिंग और नियमों के ताक पर व्यापारी जनहित की अनदेखी कर अपनी जेब भर रहे हैं।
ग्रामीणों ने इस हालातों के मद्देनजर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई है और अपने गांव को बचाने एकजुट हो रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है की क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा गहराई तक खनन किया जा चुका है जिससे हादसे की आशंका है।

पर्यावरण विभाग ने जनदर्शन में शिकायत के आधार पर मेसर्स जगदीश पटेल लाइम स्टोन माइनिंग को तत्काल बंद करने के आदेश दिए हैं और विद्युत आपूर्ति बंद करने विभाग को लिखा है।
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कलेक्टर को SIT गठित कर गहन जांच के लिए भी लिखा है और सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए कड़ी कार्रवाई की अनुसंसा की है।
बता दें की मुरा लंबे समय से माइनिंग की चपेट में है यहां लगातार विभिन्न क्रेशर खदानों में माइनिंग की शिकायत है जिसके चलते क्षेत्र धूल से पटा पड़ा है, ब्लास्टिंग के पत्थरों से आबादी क्षेत्रों में लोगों को चोंट पहुंचने और घरों में दरार की भी शिकायते यहां आम है।

जनप्रतिनिधियों की सुस्ती और प्रशासन की उदासीनता ग्रामीणों के लिए दुर्भाग्य बनता जा रहा है, ग्रामीणों की मांग हैं की अब मुरा में माइनिंग बंद की जाए ताकि वे खेती कर सकें।
गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से मिलकर पीड़ितों ने बड़े आंदोलन की रूपरेखा बनाई है और जल्द ही अपने ग्रामहितों की रक्षा के लिए ग्रामीण सड़क पर उतर कर लड़ाई लड़ेंगे।
CKS प्रदेश प्रवक्ता गजेंद्ररथ गर्व ने ग्रामीणों को पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया है और उनकी एकजुटता के लिए धन्यवाद किया है जिस तरह पूरा प्रदेश माइनिंग का गढ़ बनते जा रहा है, पर्यावरणीय परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही है को देखते हुए अब प्रदेश की जनता को अपना छत्तीसगढ़ बचाने आगे आना होगा।
लगातार बढ़ते तापमान का हवाला देकर गजेंद्ररथ ने प्रदेशवासियों से बारिश में ज्यादा से ज्यादा पौधे रोपने की अपील की और जंगलों को बचाने एकजुट होने जनता से प्रार्थना की है।

उन्होंने कहा की जिस तरह हसदेव, तमनार और बस्तर में जंगलों पर संकट गहराया है आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की पहचान बदलने वाली है, प्राकृतिक संसाधनों से युक्त छत्तीसगढ़ कोयला खदानों और भयंकर धुआं उगलते औद्योगिक घरानों का छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है जिसे रोकना जरूरी है और इसके लिए एक बड़े जनांदोलन की तैयारी आम छत्तीसगढ़ियों को करना है।
