भारतमाला में गांधी परिवार ने किया करोड़ों का खेल!

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भारतमाला में गांधी परिवार ने किया करोड़ों का खेल! बाप-बेटा, सास-बहू सबने कमाए करोड़ों

* गोपाल, जयप्रकाश और सत्यनारायण गांधी के परिजनों को 10 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा मिला।
* अकेले नायकबांधा में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा मिलने का खुलासा, अन्य गांवों की जानकारी अगली कड़ी में।
* अभनपुर के अन्य गांधी परिवारों के मुआवजा प्रकरणों की भी जांच जारी।
* राठी परिवार के कुछ लोगों को ईडी कार्यालय तलब किया गया।

संदीप शुक्ला | रायपुर

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में अभनपुर निवासी जयप्रकाश गांधी को 3 जून को गिरफ्तार किया। इसके बाद 4 जून को उसे रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की गई।

जयप्रकाश गांधी पर आरोप है कि उसने मुआवजा घोटाले के कथित मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनूजा के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गांधी परिवार के पुरुष और महिला सदस्यों के नाम पर अकेले नायकबांधा गांव में लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा प्राप्त किया गया। अन्य प्रभावित गांवों की विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

उल्लेखनीय है कि ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को इस मामले में रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई भूपेंद्र चंद्राकर, कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी रोशन चंद्राकर तथा अभनपुर के गोपाल गांधी, जयप्रकाश गांधी और सत्यनारायण गांधी से जुड़े परिसरों से कथित मुआवजा अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए थे। जब्त दस्तावेजों से यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित रूप से प्राप्त धनराशि का निवेश कहां-कहां किया गया।

56 लाख के मुआवजे को पहुंचाया साढ़े 11 करोड़ तक

जांच में सामने आया है कि गोपाल गांधी, जयप्रकाश गांधी और सत्यनारायण गांधी ने कथित रूप से हरमीत सिंह खनूजा और कुछ सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर नायकबांधा में भू-अर्जन मुआवजे का बड़ा खेल किया।

दस्तावेजों के अनुसार गांधी परिवार से जुड़े 14 मामलों में महज 0.4800 हेक्टेयर (करीब 48 डिसमिल) भूमि के बदले 11 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा स्वीकृत कराया गया। अधिकांश मुआवजा आदेश 13 अप्रैल 2020 को जारी किए गए, जबकि कुछ आदेश 27 अप्रैल 2020 को निकाले गए। आरोप है कि बाद में कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए दोबारा भू-अर्जन आदेश भी जारी किए गए।

गांधी परिवार को मिले मुआवजे की सूची में कई नाम

गांधी परिवार को मिले मुआवजों की सूची में कमला देवी गांधी, जयप्रकाश गांधी, निधि गांधी, गोपाल गांधी, लता गांधी, विनय गांधी और नीरज गांधी समेत कई नाम शामिल हैं। दूसरे चरण के भू-अर्जन में भी गांधी परिवार से जुड़े नाम सामने आए हैं।

पूरे मामले में अधिकांश जमीनों का क्षेत्रफल 0.0500 हेक्टेयर या उससे कम बताया गया है। आरोप है कि छोटी-छोटी जमीनों पर अनुपातिक रूप से अधिक मुआवजा प्राप्त करने के लिए यही तरीका अपनाया गया। एक जैसी राशि, समान प्रक्रिया और एक जैसी समय-सीमा में हुए आदेशों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

गांधी परिवार के सदस्यों के नाम पर कई प्रकरण

दस्तावेजों में गांधी परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर अलग-अलग खसरों में भू-अर्जन दर्शाया गया है। कमला देवी गांधी, निधि गांधी और जयप्रकाश गांधी के नाम एक से अधिक मामलों में सामने आए हैं। कई प्रकरणों में 0.03 से 0.05 हेक्टेयर भूमि पर 70 लाख रुपये से लेकर 1.19 करोड़ रुपये तक का मुआवजा स्वीकृत हुआ।

एक ही तारीख को जारी हुए अधिकांश आदेश

सूची में दर्ज अधिकांश राजस्व प्रकरणों के आदेश 13 अप्रैल 2020 को जारी हुए हैं, जबकि कुछ मामलों में 27 अप्रैल 2020 की तिथि दर्ज है। इसी कारण भू-अर्जन प्रक्रिया से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

गांधी परिवार ने दो बार पाया मुआवजा?

नायकबांधा में दूसरे चरण के भू-अर्जन में भी गांधी परिवार से जुड़े नाम सामने आए हैं। नीरज कुमार गांधी और बंशीलाल गांधी के नाम पर फिर से भूमि अधिग्रहण दर्ज किया गया। दस्तावेजों में कुछ खसरों के सामने “निरंक” दर्ज है, लेकिन दोबारा भू-अर्जन की प्रक्रिया ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। जांच एजेंसियां अब दोनों चरणों के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।

नायकबांधा के दस्तावेज सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां गांधी परिवार से जुड़े सभी प्रकरणों की पड़ताल में जुट गई हैं।

गांधी परिवार से जुड़े प्रमुख भुगतान

* कमला देवी गांधी — 1.79 करोड़ रुपये से अधिक
* निधि गांधी — 2.63 करोड़ रुपये से अधिक
* जयप्रकाश गांधी — 1.55 करोड़ रुपये से अधिक
* लता गांधी — 1.19 करोड़ रुपये
* किरण गांधी — 1.19 करोड़ रुपये
* विनय कुमार गांधी — लगभग 96 लाख रुपये
* नीरज कुमार गांधी — लगभग 48 लाख रुपये
* गोपाल गांधी — लगभग 48 लाख रुपये

जांच के दायरे में कई गांव

उपलब्ध दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि रायपुर जिले के अभनपुर अनुविभाग अंतर्गत नायकबांधा, झांकी, उरला, मुड़पार, सातपारा, कोलर, टोकरो, बिरोदा, नवागांव और डोमा सहित कई गांवों में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया जांच के घेरे में है।

आरोप है कि गांधी, गुप्ता, गोलछा, राठी और अग्रवाल परिवारों से जुड़े लोगों ने कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर अधिक मुआवजा प्राप्त करने की रणनीति अपनाई। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि भूमि का स्वरूप बदलकर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया तथा कुछ मामलों में राजपत्र प्रकाशन और अवार्ड एक से अधिक बार पारित किए गए।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तेजी से पूरी कर दी गई, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर अधिग्रहित भूमि का सीमांकन और नक्शों में बटांकन नहीं किया गया। ऐसे में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित इस मामले में अब उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरकारी नुकसान की भरपाई की मांग तेज हो गई है।

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