टाटीबंध के किसानों की जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ फूटा आक्रोश: दादा रामगुलाम सिंह ठाकुर के नेतृत्व में रायपुर तहसील का ऐतिहासिक घेराव
रायपुर (छत्तीसगढ़) | 15 अक्टूबर 2026
राजधानी रायपुर के टाटीबंध क्षेत्र में किसानों और मूल निवासियों की पैतृक भूमि पर भू-माफियाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कथित गठजोड़ द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जों के खिलाफ जनांदोलन तेज हो गया है। टाटीबंध के पीड़ित किसानों के समर्थन में छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के वरिष्ठ अगुआ, आंदोलनकारी और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन) के संरक्षक आदरणीय दादा रामगुलाम सिंह ठाकुर के नेतृत्व में रायपुर तहसील कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया गया।
मुख्य आरोप और जमीनी हकीकत
किसानों की जमीन पर खुला डाका: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि टाटीबंध क्षेत्र में फर्जी उदया सोसायटी की आड़ में किसानों की बेशकीमती जमीनों की हेराफेरी कर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य धड़ल्ले से कराए जा रहे हैं।
त्रिपक्षीय सांठगांठ: प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे भू-घोटाले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों (विधायक, पार्षद), राजस्व प्रशासन (तहसीलदार) और फर्जी उदया सोसायटी के पदाधिकारियों के बीच गहरी मिलीभगत है, जिसके चलते किसानों की शिकायतों को दरकिनार किया जा रहा है।
न्याय की मांग: किसानों की छीनी गई जमीन को तत्काल उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंपने, अवैध निर्माणों पर तत्काल बुलडोजर कार्रवाई करने और संलिप्त अधिकारियों व भू-माफियाओं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग रखी गई।
’जल, जंगल, जमीन’ की रक्षा का आह्वान
तहसील घेराव को संबोधित करते हुए दादा रामगुलाम सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी की पावन धरा पर मूल निवासियों के अधिकारों का हनन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
”जिस जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पुरखों ने संघर्ष किया, आज उसी जमीन से स्थानीय छत्तीसगढ़िया किसानों को बेदखल किया जा रहा है। जिन बाहरी तत्वों को सत्ता और पदों पर बैठाया गया, वे ही आज छत्तीसगढ़ के संसाधनों और जमीनों पर कब्जा कर मूल निवासियों का आर्थिक व सामाजिक शोषण कर रहे हैं। टाटीबंध का यह संघर्ष केवल एक क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और अस्तित्व रक्षा की लड़ाई है।”
प्रमुख मांगें
निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: फर्जी उदया सोसायटी और टाटीबंध क्षेत्र में हुए सभी भूमि नामांतरणों व रजिस्ट्री की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
जमीन की वापसी व अवैध निर्माण पर रोक: प्रभावित किसानों की पैतृक जमीन की वास्तविक पैमाइश कराकर उन पर हो रहे अवैध निर्माणों को तुरंत रोका जाए और भूमि किसानों को सौंपी जाए।
दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई: मिलीभगत में शामिल तहसीलदार, संबंधित जनप्रतिनिधियों और सोसायटी के पदाधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
