आईसीएआर-एनआईबीएसएम में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया…पढ़ें!

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आईसीएआर-एनआईबीएसएम में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया
रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर में 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर जागरूकता एवं ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 70 किसानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य कृषि, ग्रामीण आजीविका तथा परिवारों की पोषण सुरक्षा में महिला किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना और उन्हें टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. राय, निदेशक, ने कृषि विकास एवं ग्रामीण समृद्धि में महिला किसानों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने आजीविका के अवसर बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग पर आधारित कृषि को प्रोत्साहित करने तथा कृषक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए महिलाओं के ज्ञान, कौशल एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों तक उनकी पहुँच सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयवर्धक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों पर चार विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ. पी. मुवेंथन, प्रधान वैज्ञानिक ने आजीविका के वैकल्पिक स्रोत तथा कृषि परिवारों की आय में विविधता लाने के लिए बटेर पालन की संभावनाओं पर जानकारी दी। डॉ. प्रियंका मीणा, वैज्ञानिक ने कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक किया तथा पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि के लिए कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।
पारिवारिक पोषण के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. अजय वर्मा, वैज्ञानिक ने पोषण वाटिका की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका के माध्यम से परिवारों को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियाँ उपलब्ध कराने तथा पोषण स्तर में सुधार लाने में सहायता मिलती है। वहीं, डॉ. एस. के. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक ने वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन, जैविक पोषक तत्व प्रबंधन, कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण तथा बाहरी कृषि निवेशों पर निर्भरता कम करने में इसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
इस संवादात्मक कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आजीविका विविधीकरण, कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग, पोषण सुरक्षा तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम ने वैज्ञानिक जागरूकता, टिकाऊ कृषि तकनीकों तथा किसान-केंद्रित क्षमता विकास के माध्यम से कृषक समुदायों को सशक्त बनाने के प्रति संस्थान प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

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