अढ़ाई साल बाद अब होगी निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति…पढ़ें पूरी खबर!

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रायपुर: भाजपा सरकार के ढाई साल बाद भी नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं की गई है। एल्डरमैन बनने का ख्वाब संजोए भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने तो आस ही छोड़ दी थी, क्योंकि निकायों में सरकार बनने के छह माह में ही एल्डरमैनों की नियुक्ति की परंपरा थी। लेकिन इस सरकार ने ढाई साल बाद भी नियुक्ति नहीं की है।

चूंकि अब फिर से इस मामले काे लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री अरुण साव ने बयान दिया है कि निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, तो भाजपाइयों में फिर से उम्मीद जगी है। प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्ति का मामला एक बार फिर चर्चा आ गया है।
साय सरकार के गठन को ढाई वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन निकायों में मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। भाजपा के अनेक वरिष्ठ और जमीनी कार्यकर्ता लंबे समय से इस सूची का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एल्डरमैन नियुक्ति के माध्यम से संगठन उन कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर सकता है जिन्होंने चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
सूत्रों के अनुसार सरकार पहले चरण में नगर निगमों और बड़ी नगर पालिकाओं में नियुक्तियां कर सकती है। इसके बाद नगर पंचायतों में सूची जारी होने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों से नगरीय प्रशासन विभाग स्तर पर नामों को लेकर मंथन चलता रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका था।
एल्डरमैन को परिषद की बैठकों में भाग लेने और विभिन्न समितियों में भूमिका निभाने का अवसर मिलता है। यद्यपि उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता, लेकिन स्थानीय विकास योजनाओं और नीतिगत निर्णयों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है। इसी कारण यह पद राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जाता है।

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