जानिए उत्तम की उपलब्धि…संगीत,रंगमंच में बनाया नाम!

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संगीत और नाट्यशास्त्र पर पीएचडी करने वाले अपने जिले के पहले दृष्टिहीन विद्वान बने उत्तम कुमार वर्मा

बलौदा बाजार: इतिहास के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए, डॉ. उत्तम कुमार वर्मा ने अपनी पीएचडी पूरी कर ली है। “संगीत और रंगमंच: नाट्यशास्त्र का एक अध्ययन” (Music and Theatre – A Study of Natyashastra) विषय पर शोध करके उन्होंने इतिहास और संगीत के पारंपरिक मूल्यों को पुनर्परिभाषित किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वे अपने गांव दतान और पूरे बलौदा बाजार जिले के पहले दृष्टिहीन व्यक्ति हैं जिन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।

डॉ. उत्तम कुमार वर्मा वर्तमान में डी.के. कॉलेज, बलौदा बाजार में इतिहास विभाग के अध्यक्ष एवं सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायपुर के मूट पुरैना स्थित सरकारी दृष्टिहीन एवं मूक-बधिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से प्राचीन भारतीय इतिहास में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। 2019 में, उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अपनी पीएचडी की यात्रा शुरू की, जिसे अब सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

संगीत और नाट्यशास्त्र पर अद्वितीय शोध

डॉ. उत्तम का शोध नाट्यशास्त्र में संगीत की भूमिका को केंद्र में रखता है, जिसमें उन्होंने ध्रुवा गीतों की संरचना और उनके नाटकीय प्रस्तुतियों में उपयोग को विस्तार से समझाया है। उनके शोध ने नाट्यशास्त्र और आधुनिक रंगमंच के बीच के संबंधों को उजागर किया है और यह बताया है कि कैसे भारतीय पारंपरिक रंगमंच ने औपनिवेशिक प्रभावों के खिलाफ संघर्ष किया।

उनका शोध पत्र “नाट्यशास्त्र में ध्रुवा गीत: रंगमंचीय प्रस्तुतियों में गीतों की संरचना और उपयोग” प्रतिष्ठित “इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ मैनेजमेंट, सोशियोलॉजी और ह्यूमैनिटीज” (IRJMSH, 2023) में प्रकाशित हुआ है।

बाधाओं को पार करते हुए सफलता की कहानी

डॉ. उत्तम की उपलब्धि केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी प्रेरणादायक है। दृष्टिहीनता जैसी चुनौती के बावजूद, उन्होंने यूजीसी-नेट जेआरएफ (2018) उत्तीर्ण किया और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना स्थान बनाया। उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि शारीरिक सीमाएं केवल मानसिक अवरोध होती हैं और उन्हें तोड़कर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

उनका शोध न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समावेशी शिक्षा और दृष्टिहीनों के लिए उच्च शिक्षा में नए मार्ग खोलने का कार्य करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और भविष्य की योजनाएं

उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं, जिनमें से हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने दृष्टिहीनों के लिए तकनीकी उपकरणों की वित्तीय वहनीयता और विकासात्मक चुनौतियों पर अपना शोध प्रस्तुत किया।

भविष्य में, डॉ. उत्तम इतिहास, संगीत और रंगमंच के अध्ययन को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं। वे दृष्टिहीनों के लिए शैक्षणिक संसाधनों और डिजिटल टूल्स को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

पूरा जिला गर्वित, युवा वर्ग के लिए प्रेरणा

डॉ. उत्तम कुमार वर्मा की यह सफलता बलौदा बाजार जिले के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उनके गांव दतान में इस उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल है। जहां अब तक कोई भी दृष्टिहीन व्यक्ति पीएचडी पूरी नहीं कर पाया था, वहां उन्होंने यह कर दिखाया है।

उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर मेहनत, लगन और आत्मविश्वास हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

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