दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहन प्रसाद गुप्ता की अदालत में पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के एक महत्वपूर्ण गवाह पवन दुर्गम ने अपना बयान 04 मई 2026 को दर्ज कराया। गवाह ने अदालत को बताया कि 02 जनवरी 2025 को लापता हुए पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव 03 जनवरी को गोदाम बाड़ा बस स्टैंड के पीछे सुरेश चंद्राकर के परिसर में पुराने शौचालय की टंकी में मिला था।
पवन दुर्गम (42 वर्ष), जो खुद पत्रकार हैं, ने अदालत में बताया कि वे मुकेश चंद्राकर को अच्छी तरह जानते थे। मुकेश एनडीटीवी में रिपोर्टर थे और उनका अपना यूट्यूब चैनल “बस्तर जंक्शन” भी था। घटना से 10-15 दिन पहले मुकेश ने गंगालूर से नेलसनार तक सड़क निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की खबर प्रसारित की थी।
गवाह ने क्या कहा?
02 जनवरी 2025 को मुकेश के भाई युकेश चंद्राकर ने व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज पोस्ट किया कि मुकेश का मोबाइल बंद आ रहा है और उनका पता नहीं चल रहा।
शाम को पत्रकारों ने सिटी कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई।
03 जनवरी को गोदाम बाड़ा बस स्टैंड के पीछे सुरेश चंद्राकर के परिसर में संदिग्ध स्थिति देखी गई, जहां नया शौचालय टैंक बनाया जा रहा था।
पुलिस, तहसीलदार, नगर पालिका अधिकारियों और जेसीबी की मौजूदगी में नई कंक्रीट की ढलाई हटाई गई तो टंकी के अंदर मुकेश चंद्राकर का शव मिला। शव के सिर, गले और छाती पर चोट के निशान थे। शव टी-शर्ट और निकर पहने हुआ था।
गवाह ने अदालत में शव की पहचान, पंचनामा और बरामदगी की पूरी प्रक्रिया की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि परिसर में सुरेश चंद्राकर और रितेश चंद्राकर की निर्माण से संबंधित मशीनरी रखी जाती थी और मजदूर भी वहीं रहते थे।
प्रतिपरीक्षण में गवाह ने कहा:
पुलिस को पहले ही टंकी में शव होने की जानकारी थी।
शव परिसर में 02 जनवरी को भी पुलिस ने तलाशी ली थी।
टंकी में गंदा पानी भरा था, जिसे पंप से खाली कराया गया। शव के पास मोबाइल, पैसे या अन्य सामान नहीं मिला।
मामले में रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर, सुरेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके उर्फ छोटू आरोपी हैं। तीनों चंद्राकर भाई आपस में सगे भाई हैं।
यह बयान पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले की सुनवाई जारी है।
प्रभात सिंह की खबर
