‘अमित’ जोगी को राहत, बघेल का क्या?

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‘अमित’ जोगी को राहत, बघेल का क्या?

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अभी अमित नाम के दो शख़्स चर्चा में हैं!
एक अमित प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी के बेटे हैं जिन पर लगभग बीस साल पहले के जग्गी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहत दिया है, इससे पहले हाईकोर्ट ने अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी!

बात दूसरे अमित की जिन्हें छत्तीसगढ़ियावाद के आइकॉन के रूप में देखा जाता है, उन पर हेट स्पीच के 14 मामलों में अंतरिम जमानत के बाद अन्य मामलों में जेल की सजा भुगतनी पड़ रही है!

दोनों अमित की पेशी पिछले 20 तारीख को हुई जहां अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए सजा पर अभी रोक लगा दी, वहीं अमित बघेल की पेशी 20 से बढ़ा कर अब 29 अप्रैल कर दी गई है।
हेट स्पीच के मामलों में अंतरिम जमानत के बाद उनके चाहने वालों में खुशी थी की अमित बघेल अब जेल से बाहर आएंगे लेकिन बलौदा बाजार अग्निकांड मामले में अभी भी अमित बघेल को जमानत नहीं मिली है और वे जेल में बंद हैं।
अलगी पेशी 29 को मुकर्रर हुई है अब देखना होगा हाईकोर्ट अमित बघेल को राहत देती है या फिर पुलिस किसी मामले में कोई और FIR दर्ज कर लेती है!

दोनों अमित प्रादेशिक राजनीतिक संगठन के मुखिया!

छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है और अपने दो वर्षों के कार्यकाल के बाद जनता को बीजेपी की सरकार फूटी आंख नही भा रही ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स कहते हैं!
वहीं दूसरी ओर यह भी देखने को मिल रहा है की प्रदेश की जनता राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से तंग आ चुकी है और प्रादेशिक पार्टी पर दांव खेलने का मन बना रही है, ऐसे में स्व. अजीत जोगी की पार्टी जेसीसीजे लोगों के जहन में बैठी है, दूसरी ओर अभी सबसे ज्यादा चर्चा में प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के छांव में बनी राजनीतिक दल जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का नाम है।

सत्ता भोग रहे दोनों दल बीजेपी, कांग्रेस को प्रादेशिक दलों से ही खतरा है!
ऐसे में इन दलों के मुखिया ही जब कानूनी मकड़जाल में फंसे हों, तो कुछ हद तक राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को राहत है और प्रादेशिक पार्टियां नेतृत्व विहीन हुई हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी, छत्तीसगढ़ियावाद को धरातल पर उतारने वाले पहले शख़्स!

छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य की पहचान मिलने के बाद दुनियाभर में जिनके नाम से नव प्रदेश को जाना गया वे अजीत जोगी ही थे, भयंकर आकाल में जनता को जोगी डबरी के माध्यम से अनाज और नकदी देने की शुरुआत जोगी ने ही किया, छत्तीसगढ़ में उनकी छवि रॉबिन हुड वाली ही रही, हमेशा पीड़ित वंचित वर्ग को सहारा देने वाले स्व. जोगी के नेतृत्व में ही छत्तीसगढ़ में कई पंत धर्मावलंबियों के गुरु परिवारों के लिए राजनीति के रास्ते खुले!
छत्तीसगढ़ियावाद जोगी को जन्मजात मिला था क्योंकि वे ठेठ छत्तीसगढ़िया थे, हर प्रांत के व्यक्ति में यह भाव होता है और जब प्रदेश की सेवा में लगे तो उन्होंने बाहर प्रांत से आकर छत्तीसगढ़ियों को ठगने वाले, लूटने वाले बहु रुपियों को निशाना बनाया जो एक प्रदेशवादी का कर्तव्य है।
इसी महीने की 29 तारीख को स्व. अजीत जोगी की जयंती भी है और अमित बघेल की पेशी भी!

छत्तीसगढ़ में प्रदेशवाद की हवा!

बीते एक दशक से प्रदेश में गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना तत्परता से काम कर रही है, जिसके परिणाम स्वरूप आज प्रदेश की जनता अपने अधिकारों के लिए सजग हुई है, हर स्तर पर जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ी जा रही है कॉरपोरेट सरकारों की औद्योगिक नीतियां इस वाद पर आग में घी का काम कर रही है, पूरा प्रदेश परप्रांतवाद और सरकारों की आउट सोर्सिंग नीति से त्रस्त है, लगातार स्थानीयता मजबूत हो रही है, भाषाई अस्मिता के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है, ऐसे में आने वाला भविष्य बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करती है और यही बदलाव क्षेत्रीय नेताओं के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के दमनकारी होने का कारण है।

आलेख: गजेंद्ररथ गर्व
प्रदेश अध्यक्ष – छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ
प्रदेश प्रवक्ता, सलाहकार CKS, CFA
9827909433

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