स्वार्थ के लिए ही सही, प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुडें: गजेंद्ररथ गर्व
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां बसावट शुरू से ही कभी घनी नहीं रही और लोगों में एकांतवास की ही प्रवृत्ति हमेशा जीवंत रही,
लेकिन अब जब यह छोटा सा राज्य अकूत मिनरल का खजाना परिचित हो चुका है और लगातार इस रत्नगर्भा धरती पर खनन माफियाओं की नजर है तब प्रदेशवासियों को एकजुट होना बहुत जरूरी है।
राज्य निर्माण के बाद से ही प्रदेश में परप्रांतियों की आमद और प्रदेश के संसाधनों पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति ने स्थानीय लोगों में गुस्सा भरा और गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जैसी कोई संगठन बनते बनते बन पड़ा!
आज हर प्रादेशिक हित से जुड़े मामलों में CKS की दखल!
छत्तीसगढ़ियों की भावना कभी नेतृत्व करने की नही रही, वे हमेशा दूसरों को आगे करने वाले ही रहे, भले ही मेहनत खुद करें लेकिन श्रेय पाने का लालच उन्हें कभी नहीं रहा, इसे क्या कहें लोकप्रियता का भय या फिर चेहरा बनने का डर?
पर आज ऐसा नहीं है एक दबंग संगठन जो अपनी बात अपनी शर्तों पर करता है अपने लोगों के लिए लड़ता है, स्थानीयता, भाषाई अस्मिता और परंपरागत रूढ़ीवादी देवठानो के पुनर्विकास का बीड़ा उठाए आगे बढ़ रहा है, गैर राजनीतिक संगठन CKS जो कभी गिनती के लोगों ने संगठित होकर बनाई थी आज प्रदेश के हर पीड़ित शोषित और दबे कुचले लोगों की ताकत है।
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोई, जो सुख में सुमिरन करे तो दुख कहां से होई! जैसी लाइन CKS के लिए ही बना हुआ लगता है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में शामिल लोग भी अपनी तकलीफों में CKS को ही पुकारते हैं या फिर पीड़ितों को CKS का ही सलाह देते हैं!
हमने हर वो लड़ाई लड़ी जो हमारे अपनों का था, एक पूर्व मंत्री ने जब पुलिस वाली बहन से बदतमीजी की तब CKS ने ही उसके बेगैरती पर थूका…जबर थूको आंदोलन, जबर लाठी, हर जबर आंदोलनों के पीछे सिर्फ एक ही मकसद स्थानीय लोगों के अपमान, शोषण और अनदेखी का प्रतिकार!
इसी मुगालते ने हमें एक राजनीतिक दल बनाने प्रेरित किया और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के रूप में लाल गमछे ने राज्य की सत्ता तक पहुंचने की आशा बांधी और क्यों न बांधती, जिनके लिए CKS लड़ती है वे जनता ही तो है फिर इसी जनता को सरकार भी चुनना होता है, ऐसे में जो संगठन गैर राजनीतिक रूप में लड़ता जीतता है तो क्यों न राजनीतिक निर्णयों की साख बने?
लेकिन हां, राजनीति की परिभाषा कुछ अलग है, इसकी शुरुआत कूटनीति से होती है और हुई, पर गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना कभी रुकी नहीं, थकी नही और अनवरत आगे बढ़ रही है, अपनों के लिए, अपनी भाषा के लिए, अपनी स्थानीय मूल्यों के लिए और यकीनन सत्ता शीर्ष पर भी आम छत्तीसगढ़िया ही होगा अपनी मान्यताओं और भावनाओं के साथ।
अब तो हर छत्तीसगढ़िया जो अपनी छत्तीसगढ़ महतारी की पीड़ा समझ रहा है, अपने सीने पर महसूस कर रहा है, स्वस्फूर्त संगठन का हिस्सा बन रहा है और बनना होगा, किसी स्वार्थ में ही सही, कोई लालच लेकर ही सही पर अब आम छत्तीसगढ़िया को एकजुट होना होगा, सिर्फ इसलिए नहीं की उन्हें लड़ना है, इसलिए भी क्योंकि महतारी अस्मिता का सवाल है!
हमें किसी से बैर नहीं, हम किसी को भगाना, हटाना नही चाहते, बस हमारी संस्कृति भाषा और मान्यताओं पर गैरों के दखल नहीं चाहते।
अब हमारी सोंच पैर फैला रहे हैं, हाथ बढ़ रहे हैं, छत्तीसगढ़िया वाणिज्य, उद्योग महासंघ, मजदूर कामगार यूनियन, वाहन चालक मालिक संघ, सरकारी, गैर सरकारी नौकरीपेशा संगठन, अधिकारी कर्मचारी संघ, जनप्रतिनिधि महासभा और अब तो पत्रकार महासंघ जैसी संस्थाएं स्थानीयता और क्षेत्रीय अधिकारों के लिए काम कर रहे हैं।
बढ़ते परप्रांतवाद, औद्योगिकीकरण, गुंडागर्दी और कॉरपोरेट घरानों के दादागिरी से त्रस्त छत्तीसगढ़िया समाज जाग चुका है, अपनी पीढ़ियों को अपनी परम्पराओं को सहेजने उनपर गर्व करने के लिए आप सब को भी साथ आना होगा।
भारत मां के रतन बेटा बढ़िया हंव जी…मैं छत्तीसगढ़िया हंव जी।
ये पंक्तियां हमें हमारे देश के लिए मर्यादित रहने की राह दिखाती है और साथ ही अपनी स्थानीयता, परंपराओं को संजोए रखने का कर्तव्यबोध भी।
आलेख: गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेश प्रवक्ता, सलाहकार CKS गैर राजनीतिक संगठन 9827909433
