विज्ञान, कृषि, स्वास्थ्य और उद्योग में जैव प्रौद्योगिकी के व्यापक अवसर : डॉ. पंकज शर्मा

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विज्ञान, कृषि, स्वास्थ्य और उद्योग में जैव प्रौद्योगिकी के व्यापक अवसर : डॉ. पंकज शर्मा
रायपुर, 13 अगस्त 2026: एमिटी यूनिवर्सिटी, रायपुर में नवप्रवेशित बी.टेक. बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी एवं एम.एससी. बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने विद्यार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के उभरते अवसरों एवं भविष्य की संभावनाओं पर प्रेरणादायी व्याख्यान दिया।
डॉ. शर्मा ने “जैव प्रौद्योगिकी: सूक्ष्म अणुओं से वैश्विक प्रभाव तक” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत औद्योगिक विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी अब केवल पारंपरिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, डेटा साइंस, चिकित्सा और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के समन्वय तक हो गया है।
कार्यक्रम में डॉ. वाराप्रसाद कोल्ला, निदेशक तथा डॉ. बालासुब्रमण्यन, विभागाध्यक्ष, बायोटेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी ने डॉ. पंकज शर्मा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक जीवन की शुरुआत में ही आधुनिक वैज्ञानिक विकास, नवाचार और करियर के अवसरों से परिचित कराना आवश्यक है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने जीनोम एडिटिंग, सिंथेटिक बायोलॉजी, आणविक निदान, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिसीजन एग्रीकल्चर, पौध–सूक्ष्मजीव अंतःक्रिया, जैविक कीट प्रबंधन, जलवायु-सहिष्णु फसलें तथा कम्प्यूटेशनल बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को जीव विज्ञान के साथ सांख्यिकी, प्रोग्रामिंग, डेटा विश्लेषण और एआई का ज्ञान विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि भविष्य के वैज्ञानिकों के लिए वेट-लैब के साथ कम्प्यूटेशनल कौशल भी आवश्यक होंगे।
डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों में शोधपरक सोच विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने परीक्षा-केंद्रित अध्ययन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक प्रश्न पूछने की आदत विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष से ही प्रयोगशाला कौशल, कम्प्यूटेशनल क्षमताओं, वैज्ञानिक संचार, इंटर्नशिप और शोध अनुभव सहित अपना कौशल-पोर्टफोलियो विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने “T-shaped profile” की अवधारणा समझाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों का व्यापक ज्ञान रखने के साथ-साथ किसी एक विशिष्ट क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता विकसित करनी चाहिए।
डॉ. शर्मा ने शोध एवं अकादमिक क्षेत्र, बायोटेक्नोलॉजी एवं फार्मास्यूटिकल उद्योग, कृषि, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, जीनोमिक्स, डेटा साइंस, एआई/एमएल, वैज्ञानिक संचार, नियामक मामलों तथा उद्यमिता में उपलब्ध करियर अवसरों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि कौशल, वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और वास्तविक समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना होना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रसन्न चौधरी ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने डॉ. पंकज शर्मा द्वारा विद्यार्थियों के साथ साझा किए गए बहुमूल्य वैज्ञानिक विचारों, अनुभवों और प्रेरणादायी मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद किया।

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