दिल्ली की जंतर मंतर से दो तरह की विचारधाराओं में बंट गया देश?
देश की राजधानी दिल्ली में प्रोटेस्ट करने आए विद्यार्थियों पर पुलिसिया कार्रवाई के बाद देश भर में आक्रोश है, इस घटना के बाद दो तरह की विचारधारा स्पष्ट हुई हैं।
देश में विद्यार्थियों के लिए था आंदोलन तो देश विरोधी लोगों का जंतर मंतर में क्या काम?
लगातार कुछ नामों और चेहरों को देश विरोधी बताया जा रहा है, सरकार के खिलाफ आवाज को देश के खिलाफ आवाज बताने की होड़ सी लगी है, तथाकथित राष्ट्रवादी अपने सोशल मीडिया हेंडल्स पर बड़े बड़े आलेख लिख रहें और यह बताने की कोशिश हो रही है की, सिस्टम से तकलीफ है तो देश के खिलाफ बातें क्यों?
कौन सी बातें हैं जो देश के खिलाफ है?
यही की कोई कह रहा, कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं, अल्लाह के गीत या किसी टुकड़े गैंग की उपस्थिति या नीता सीता के मुहावरे?
इस एक आक्रोश ने सच में देश के युवाओं की ताकत दिखा दी है पर तथाकथित बुद्धिजीवी, मोडीफाई मीडिया इसे लगातार टुकड़े गैंग या भारत विरोधी आंदोलन बताने की कोशिश कर रहे हैं, किसे खुश करना चाहते हैं, किसके लिए लिख बोल रहें हैं? जनता जानती है।
सोनम वांगचुक अनशन पर थे 20 दिनों का भूख हड़ताल देश में पहली बार हुआ, सरकार इसे तुड़वाना छोड़कर अनशन करते इंसान को ही वहां से हटा कर हॉस्पिटल शिफ्ट कर देती है, यह भी पहली बार हुआ!
युवाओं में आखिर इतना आक्रोश क्यों?
इस देश में पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है अब तक 152 पेपर लीक हो चुके हैं यही गुस्सा युवाओं के भीतर पल रहा था सालों से, इस बार जब NEET का पेपर लीक हुआ और स्टूडेंट्स सुसाइड करने लगे (अब तक 22 होनहार बच्चे इस यज्ञ की आहुति हो चुके) और इसी बीच CJI का बयान की देश का युवा कोकरोच जैसे?
फिर क्या था इस नामकरण पर एक पार्टी ही बन गई कोकरोच जनता पार्टी यानी CJP जिसने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड तोड़ दिया, देश भर के युवा जुड़ने लगे, कारवां बनने लगा इसी बीच देश के इनोवेटर और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का इन मुहिम से जुड़ना, दिल्ली जंतर मंतर में भूख हड़ताल की शुरुआत, लोगों का शामिल होना, जिन्हें कथित राष्ट्रवादी देश का दुश्मन या लेफ्टिस्ट बताते हैं ये कौन लोग हैं वही जो सरकारों की तरफदारी, पैरोकारी नही करते, सवाल करतें हैं, जवाबदेही की बातें करतें हैं? और आखिर उन्हें किसने रोक रखा था जो देश और बच्चों के भविष्य की बातें आज उनके पीट जाने के बाद कर रहे हैं, जाते वे भी जंतर मंतर?
अगर किसी विभाग में गड़बड़ी हुई जिससे मौतें हुई तब उस विभाग के मंत्री की जवाबदेही क्या है?
और अगर स्टूडेंट्स ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांग लिया तो क्या गलत किया, उन्हें तो सामने से इस पद को छोड़ने की घोषणा कर देनी चाहिए थी, इतना नही होता जो हुआ और न ही सरकार की इतनी किरकिरी होती, जो तानाशाह चेहरा सामने आया उसे कुछ और सालों तक छुपाए रखा जा सकता था?
कुल मिलाकर अब देश को पूर्णतः खबर है की यह सरकार अमीर और वर्ग विशेष पूंजीपतियों को संरक्षित करने वाली सरकार है जिसके चोले में राम नाम का धर्म ध्वजा फहरा हुआ है?
इस देश का बहुताय हिंदू समाज देश को धर्म का आखाड़ा नहीं बनाना चाहता महज कुछ ठेकेदार जिनका धंधा इस युक्ति से चल रहा है वही इसे हवा देकर भड़काए रखना चाहते हैं!
इन आंदोलन ने एक बात और स्पष्ट किया की देश की जनता को बीजेपी, कांग्रेस या अन्य किसी भी राजनीतिक दलों से कोई लेना देना नहीं है बस वे इतना ही चाहते हैं की देश संविधान की सड़क पर चले और सियासतदान अब देशवासियों को सिर्फ वोटर न समझें और वे नेता हैं देवताओं के अवतार बनने की कोशिश न करें?
देश में सरकारी सिस्टम ने लोगों को हताश कर दिया है, महंगाई, बेरोजगारी, मनमानियां और एकाधिकार के चलते यूं लग रहा है जैसे यह देश उन्ही का है जिनके पास पैसा और पावर है, जिनके पास पैसा पावर नहीं है वे मानवाधिकारों और न्याय की बात न ही करें?

गजेंद्ररथ गर्व, संपादक – प्रदेशवाद
प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ
