छत्तीसगढ़: दो डिप्टी CM का फार्मूला होगा खत्म?

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रायपुर: साय सरकार के मंत्रियों के कामकाज की भाजपा संगठन ने समीक्षा शुरू कर दी है। समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना है। सत्ता और संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीने तक किसी बड़े फेरबदल की संभावना नहीं है। भाजपा नेतृत्व ने फिलहाल मंत्रियों के कामकाज, विभागीय उपलब्धियों और जनहित योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा पर फोकस किया है।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के गठन के बाद से ही विभिन्न विभागों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं की जमीनी स्थिति, बजट खर्च, घोषणाओं का क्रियान्वयन तथा जनता से जुड़े मामलों के निराकरण को समीक्षा का प्रमुख आधार बनाया गया है। जिन विभागों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, वहां जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि पिछले कई महीनों से राजनीतिक गलियारों में साय सरकार के चार मंत्रियों को हटाने की चर्चा चल रही है। भाजपा संगठन के नए विस्तार, निगम-मंडलों में नियुक्तियों और स्थानीय निकायों में राजनीतिक संतुलन को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि अब संकेत हैं कि सरकार जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन के बाद ही कदम उठाएगी।

महाराष्ट्र, हरियाणा या राजस्थान से हो सकता है नया प्रभारी

भाजपा सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति केंद्रीय नेतृत्व द्वारा इस माह की जाएगी। महाराष्ट्र, हरियाणा या फिर राजस्थान से किसी वरिष्ठ नेता को बनाए जाने की चर्चा है। बता दें कि नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ही से नए प्रदेश प्रभारी का इंतजार है। फिलहाल नितिन नबीन ही इस प्रभार को संभाल रहे हैं।

दो डिप्टी सीएम का फार्मूला हो सकता है खत्म
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा भविष्य में “दो डिप्टी सीएम” वाले फॉर्मूले पर पुनर्विचार कर सकती है। क्योंकि हाल में पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार में किसी को भी डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया है। दो-दो डिप्टी सीएम होने से सत्ता का पॉवर भी बंट जाता है। ऐसे में अब सिंगल पॉवर पर फोकस किया जाएगा। माना जा रहा है कि पार्टी संगठन अब राज्यों में सत्ता संरचना को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस विषय पर गंभीर मंथन चलने की चर्चा है।

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