प्रदेश की सबसे बड़ी और ताकतवर गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना अब किसी पहचान की मोहताज नहीं बीते दस सालों में जिस तरह से आम छत्तीसगढ़िया की लड़ाई यह संगठन लड़ रहा है, आने वाला समय इसके राजनीतिक प्रखंड का ही होने वाला है! लेकिन कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर CKS के दो गुटों के बीच जिस तरह से जुबानी जंग तेज हो गई और आरोप प्रत्यारोप बढ़ रही है इससे जरूर संगठन स्तर पर नुकसान होने के आसार है!

सेना की दो गुटों में मतभेद नही सिर्फ मनभेद!
एक दशक से छत्तीसगढ़ की राजनीति को गैर राजनीतिक होकर प्रभावित करने वाली निडर और तेज जुबान वाली यह संगठन अब आम छत्तीसगढ़ियों के दिलों में राज कर रही है इसमें कोई दो मत नहीं!
बात चाहे प्रशासनिक उदासीनता की हो, राजनीतिक अत्याचार की हो या फिर औद्योगिक घमंड की सबसे निपटने जनता का मनपसंद संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ही है, लेकिन राजनीतिक प्रखंड और विधानसभा चुनाव के बाद कुछ टूट आई है जिसे अभी भी संभाला जा सकता है!

किसी भी गैर राजनीतिक संगठन का एक राजनीतिक प्रखंड को जन्म देना और उसे चलाना आसान नही है पर एक क्षेत्रीय गैर राजनीतिक संगठन ने यह हिम्मत दिखाई यह काबिले तारीफ़ है!
छत्तीसगढ़ में मुख्यतः आदिवासी, सतनामी और ओबीसी अंतर्गत तेली, कुर्मी, नाउ, धोबी सहित अनेक वर्ग व जातियां हैं इन्हें एक करना शुरू से बहुत कठिन रहा और अब तक जारी बाहरी लोगों के अधिकार युक्त होने की परंपरा भी इन्ही एसटी, एससी और ओबीसी संवर्गों की ही भला मनसी का नतीजा है?
आज CKS में गुटबाजी का मुख्य कारण भी यही भावना है, छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज अपने अधिकारों के लिए सक्रिय उग्र जागृत समाज बन चुका है, वहीं आदिवासी वर्ग सिर्फ धुरी में बंधा है और सवर्णों को अपनी पीठ पर लादे हुए है ऐसा राजनीतिक जानकर कह रहे हैं! वहीं ओबीसी एक ऐसा संवर्ग है जिन्हें अपनी ताकत का पता ही नही, क्योंकि ये कभी एक नही हुए, इस वर्ग में मैं बढ़ा का कड़ा गणित है, तेली, कुर्मी में कभी पटती नही? और यही समाज सनातन के सबसे बड़े अनुयायी हैं?
CKS में सबसे पहले खेप की कड़ी सतनामियों और आदिवासियों की रही और उनकी उदारता देखिए ओबीसी चेहरे को अपना नेतृत्वकर्ता चुना?
इसके बाद से संगठन के सतनामी टूटने लगे इसका बड़ा कारण सतनामी समाज के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में ऊंचे स्थान पर जमे लोगों का अपनी राजनीति खत्म होने का डर था और उन्होंने जातीय समीकरण के लिए खेल खेला?
अब बारी आई आदिवासी समाज की जिस समाज के निर्देशन में कांसा दान महाअभियान जैसा ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ, पर जैसे ही राजनीतिक पार्टी बनाने की बात आई आदिवासी भी अलग हो गए! यह भी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के जातिगत षड्यंत्र का एक कोर ही था!
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का उदय और विधानसभा चुनाव
जैसे तैसे CKS ने ओबीसी नेताओं के मार्गदर्शन में राजनीतिक दल बनाया यथाशक्ति चुनाव में जोर आजमाइस हुई, 15 दिन की पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी, जमानत जप्त होना था सो हुआ पर अब क्योंकि राजनीतिक प्रखंड और गैर राजनीतिक संगठन को एकसाथ चलाना था एक ही मंच से, उन्ही लोगों में जो गैर राजनीतिक संगठन का हिस्सा थे और अब उन्हें राजनीतिक होना था!
दरअसल सेना भी सारे राजनीतिक मुद्दों पर ही काम करता है सो यह JCP से पृथक नहीं था लेकिन राजनीतिक दल को चलाने के लिए नेतृत्व पृथककरण जरूरी था, ऐसे में गैर राजनीतिक दल का नेता राजनीतिक हो गया और उसके करीबी को गैर राजनीतिक संगठन का नेता चुना गया जिस पर भी लगातार सवाल उठते रहे? लेकिन यह एक कार्यक्रम में सबकी उपस्थिति में हुआ।
सेना के लोगों में मतभेद कभी न हुआ बस मनभेद लगातार बना हुआ है, जिसे एक प्रयास से ठीक किया जा सकता है क्योंकि कहीं इसी तरह मन भेद के चलते दुसरे धड़े में लोगों की संख्या बढ़ती रही तो मुख्य संगठन का पूरक संगठन में सांविलियन तय है?
काना फूसी और खास बनने की चालाकी ने तोड़ा संगठन!
कोई भी संगठन जब बड़ा बनता है उसमे तरह तरह के लोग शामिल होते हैं, कभी एक परिवार की तरह रहने वाले सेनानियों में राजनीतिक पार्टी निर्माण के बाद मन मुटाव शुरू हुए इसका बड़ा कारण था बड़े नेतृत्व का खास बनने, करीबी कहलाने और शीर्ष नेतृत्व के कानों में शिकायती कानाफूसी!
वहीं नए नवेले सेनानियों को बड़ी जिम्मेदारी देना भी लंबे समय से काम करने वाले सेनानियों के संगठन से टूटने का बड़ा कारण बना, अभी लगभग 70% सेनानी नए हैं पुराने अब क्यों नहीं दिखते? यह सवाल अक्सर लोग पूछते भी हैं।
राजनीतिक दल बनने के बाद भैयावाद और जीहुजूरी ने भी अपना रंग दिखाया, हर मंच पर सवाल जवाब और निष्कर्ष की बात करने वाली गैर राजनीतिक संगठन में अब सवालों पर परिवार निकाला की सजा दी जाने लगी और निकलने वालों ने अपना अलग परिवार बना लिया पर नाम वही गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना तो क्या राजनीतिक पार्टी के साथ वाली CKS राजनीतिक पार्टी है? ऐसा सवाल भी अब पूछे जाते हैं?
CKS आम छत्तीसगढ़िया समाज की उम्मीद!
धड़े कितने भी हो लेकिन काम एक ही है, स्वाभिमानी पुरखों का स्वप्न साकार करना, छत्तीसगढ़ की सत्ता में छत्तीसगढ़ियों की पीड़ा से व्याकुल हो उठने वाली सरकार स्थापित करना, भाषा और संस्कृति को उच्च देखना और इस काम के लिए अब एक ऐसे वैचारिक मजबूती की जरूरत है जिसके प्रयास से सारे मनभेद खत्म हो! क्योंकि मत एक है छत्तीसगढ़ियावाद
गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, पूर्व अध्यक्ष रायपुर जिला ग्रामीण CKS, पूर्व केंद्रीय कार्यकारणी सदस्य JCP
