सब्बो छत्तीसगढ़िया अब एक साथ…मिलकर बचायेंगे जल जंगल जमीन!
छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीसरे मोर्चे का जन्म!
छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस से अलग एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के गठन की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में रायपुर के तेलीबांधा स्थित होटल बेबीलॉन कैपिटल में अनेक राजनीतिक दलों, क्षेत्रीय संगठनों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
बैठक में साझा न्यूनतम कार्यक्रम, संगठनात्मक समन्वय, चुनावी तालमेल और संयुक्त घोषणापत्र को लेकर प्रारंभिक विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न दलों ने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ के साझा हितों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में जल-जंगल-जमीन, स्थानीय रोजगार, किसान, आदिवासी अधिकार, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता, विकेंद्रीकरण, पारदर्शी शासन और छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय भागीदारी जैसे मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखने पर चर्चा हुई।
बैठक में बहुजन समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), हमर राज पार्टी, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ महतारी पार्टी सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की ओर से रायपुर संभाग अध्यक्ष श्री जीतू बंजारे, बस्तर संभाग अध्यक्ष एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक श्री नवनीत चाँद, बस्तर जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्री संतु कश्यप एवं बस्तर संभाग प्रवक्ता श्री ओम मरकाम सहित प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ के मुद्दों पर साझा संघर्ष का संकल्प
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित मंच का उद्देश्य केवल चुनावी तालमेल तक सीमित न रहकर छत्तीसगढ़ की जनता के वास्तविक सवालों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना होगा।
बस्तर से सरगुजा तक—जल, जंगल, जमीन, रोजगार, किसान, आदिवासी अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर साझा आवाज मजबूत करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक संघर्ष करने की दिशा में आगे बढ़ने पर विचार किया गया।
निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
प्रतिनिधियों ने निर्वाचन प्रक्रिया में संवैधानिक पारदर्शिता, निष्पक्षता, समान अवसर और मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी। भारत निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी प्राप्त है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सर्वोपरि है और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक सूचनाएं एवं प्रक्रियाएं राजनीतिक दलों तथा मतदाताओं के समक्ष पारदर्शी ढंग से उपलब्ध होनी चाहिए।

25 अक्टूबर को अगली बड़ी बैठक
तीसरे मोर्चे की अगली बड़ी बैठक 25 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में व्यापक विचार-विमर्श के बाद प्रस्तावित मोर्चे के स्वरूप, साझा राजनीतिक एजेंडे, संगठनात्मक ढांचे और आगे की रणनीति को अंतिम रूप देकर छत्तीसगढ़ की जनता के समक्ष रखा जाएगा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक दिशा केवल सत्ता परिवर्तन का विषय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया हितों, संवैधानिक अधिकारों और जवाबदेह शासन की मजबूत आवाज तैयार करने का प्रयास है।
सत्ता की सियासत से आगे ‘छत्तीसगढ़ के मुद्दों’ की राजनीति!
तीसरे मोर्चे की कवायद में सबसे बड़ा जोर इस बात पर दिखाई दिया कि प्रदेश की राजनीति में स्थानीय मुद्दों और छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय अस्मिता को प्रमुखता दी जाए। नेताओं ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों के साथ सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय अधिकारों को साझा एजेंडे में शामिल करने पर सहमति जताई।
यानी आने वाले समय में यह मोर्चा सिर्फ चुनावी गठजोड़ रहेगा या फिर छत्तीसगढ़ की स्थानीय राजनीतिक पहचान को केंद्र में रखकर एक व्यापक आंदोलन का स्वरूप लेगा, यह 25 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
50 दल एक मंच पर, अब सीटों का गणित बाकी
बैठक में बहुजन समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़, हमर राज पार्टी, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा और छत्तीसगढ़ महतारी पार्टी समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सूत्रों के मुताबिक घटक दलों के बीच साझा घोषणापत्र और सीटों के बंटवारे को लेकर भी प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है। अंतिम रूप अगले दौर की बैठक में दिए जाने की बात कही गई है।
चुनाव आयोग को लेकर भी उठे सवाल
बैठक में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी चिंता जताई गई। उपस्थित नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की बात कही और निर्वाचन प्रक्रिया में नियमों तथा कानूनों के कड़ाई से पालन की मांग उठाई।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं। कांग्रेस ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
