‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत हरियाली के संकल्प से…
रायपुर, 4 अगस्त। “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” के तहत मंगलवार को आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार के 100 सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखते हुए वृक्षारोपण, खेलकूद एवं सामाजिक सेवा जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा उनमें पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने अशोक का पौधा रोपकर किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध समाज की नींव भी मजबूत करते हैं। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, हरित वातावरण और सुरक्षित भविष्य का संदेश है।” उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति से जुड़ाव ही स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त समाज की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

डॉ. राय ने कहा कि “नशा मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाएंगे। वृक्षारोपण ऐसा ही एक सशक्त माध्यम है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करता है।”
कार्यक्रम में संस्थान के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य कार्मिकों ने मिलकर संस्थान परिसर में लगभग 75 अशोक के पौधों का रोपण किया और उनकी देखभाल का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा एवं डॉ. अनिल दीक्षित ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

संस्थान द्वारा आयोजित यह वृक्षारोपण अभियान युवाओं को प्रकृति से जोड़ने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा विकसित एवं नशामुक्त भारत के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. के. सी. शर्मा ने किया।
