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खरोरा: ग्राम पंचायत केसला की सरपंच माया वंश को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और चुनावी नामांकन के दौरान तथ्यों को छिपाने से जुड़े मामले में कलेक्टर न्यायालय रायपुर ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें सरपंच पद से पृथक कर दिया है। न्यायालय ने उन्हें पंचायत पदाधिकारी बने रहने के लिए अयोग्य घोषित किया है। इस फैसले के बाद ग्राम पंचायत केसला की राजनीति में हलचल मच गई है। मामला ग्राम केसला की शासकीय भूमि खसरा नंबर 78/1 से जुड़ा है, जिसका कुल रकबा 8.489 हेक्टेयर बताया गया है। आरोप था कि उक्त शासकीय भूमि के लगभग 900 वर्गफीट हिस्से पर मकान एवं बाड़ी का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है। इसी मामले को लेकर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों एवं दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कलेक्टर न्यायालय ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 36 के प्रावधानों के तहत माया वंशे को सरपंच पद के लिए निरर्हित माना। न्यायालय ने उन्हें सरपंच पद से पृथक करने का आदेश जारी किया।

मामले में माया वंश की ओर से अपना पक्ष रखते हुए इंदिरा आवास योजना के तहत मकान निर्माण होने तथा ग्राम पंचायत की पुरानी बैठक के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इसके बावजूद न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों एवं मामले के तथ्यों के परीक्षण के बाद अयोग्यता की कार्रवाई का आदेश दिया। कलेक्टर न्यायालय रायपुर द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी आदेश की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत तिल्दा-नेवरा को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। फिलहाल इस फैसले ने ग्राम पंचायत केसला में सरपंच पद को लेकर नई स्थिति पैदा कर दी है। शासकीय जमीन से जुड़े मामले में न्यायालय की इस कार्रवाई को पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही और नियमों के पालन से जोड़कर देखा जा रहा है।
