एनआईबीएसएम ने किसानों को दिया वैज्ञानिक सरसों उत्पादन का प्रशिक्षण व उन्नत बीज
200 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को वितरित किया गया उन्नत किस्म DRMR 150-35 का बीज

रायपुर, 4 नवंबर 2026। देश में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग तथा खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसी दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत संचालित फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम के माध्यम से आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर द्वारा किसानों को सरसों की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसी कड़ी में आज संस्थान में ग्राम बरोंदा, अढ़सेना, गनियारी, असोंदा एवं मोह्दी से आए लगभग 157 किसानों के लिए सरसों के वैज्ञानिक उत्पादन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर किसानों को लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में सरसों की बुवाई के लिए उन्नत किस्म DRMR 150-35 का बीज वितरित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने तिलहन फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में खाद्य तेलों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए सरसों सहित अन्य तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाना समय की मांग है। इससे न केवल खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों की आय एवं कृषि आधारित आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने तथा वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से तिलहन उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।
संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को सरसों की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने धान की कटाई के बाद खेत की उचित तैयारी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, बीज दर एवं पौधों के बीच उचित दूरी के महत्व को समझाया। उन्होंने सरसों की फसल में सल्फर की आवश्यकता पूरी करने के लिए जिप्सम के उपयोग तथा फास्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के प्रयोग की सलाह दी। उन्होंने बताया कि संतुलित पोषण प्रबंधन से फसल की पैदावार के साथ-साथ दानों में तेल की मात्रा एवं गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में ग्राम बरोंदा के सरपंच श्री प्रदीप मडारिया, अढ़सेना के सरपंच श्री तेजराम पाल तथा गनियारी के सरपंच श्री राजेंद्र निर्मलकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं किसान उपस्थित रहे।
फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विशेषकर जनजातीय एवं ग्रामीण किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करना, उनकी कृषि उत्पादकता बढ़ाना तथा उन्नत कृषि तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में फार्मर फर्स्ट परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. पी. मुवन्थन एवं डॉ. प्रियंका मीना तथा उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

