नपं खरोरा चुनाव 2025: उम्मीदवारों को लेकर बड़ा अपडेट जरूर पढ़ें!

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नगर पंचायत खरोरा में आज उम्मीदवारों की स्थिति साफ हो जाएगी, अब तक सिर्फ एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल किया है, वहीं कांग्रेस से मोना बबलू भाटिया आज नामांकन दाखिल कर सकती हैं!
इधर बीजेपी उम्मीदवार को लेकर अब स्थिति स्पष्ट है सुनीता अनिल सोनी बीजेपी से प्रत्याशी घोषित हुई हैं, बीजेपी के ही निशा अरविंद देवांगन ने भी नामांकन फार्म खरीदा है और अब शायद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन आज करने की तैयारी है।
खरोरा नगर पंचायत में इस बार मुकाबला तगड़ा होने के आसार हैं, पुरानी बस्ती से सिर्फ एक उम्मीदवार निशा अरविंद देवांगन है दूसरी ओर सड़क पार से तीन प्रत्याशी मैदान में हैं ऐसे में निशा अरविंद देवांगन की जीत सौ फीसदी तय मानी जा रही है, तो वहीं अटकलें यह भी है की निशा अरविंद देवांगन बीजेपी के पक्ष में अपना इरादा भी बदल सकती है ऐसे में खरोरा नगर पंचायत का मामला पुरानी बस्ती की वर्चस्व को लेकर संशय की स्थिति में है।

अब तक मैदान में चार प्रत्याशियों की उपस्थित दिख रही है जिनमें, कांग्रेस से मोना बबलू भाटिया, बीजेपी सुनीता अनिल सोनी, हीरा अशोक अमलानी और निशा अरविंद देवांगन इन चारों में निशा अरविंद को शुरू से जिताऊ प्रत्याशी माना जा रहा है क्योंकि पुरानी बस्ती से सिर्फ एक उम्मीदवार है और लगभग एक से सात नंबर वार्ड के साथ ही सड़क उसपार के कई वार्डों की जनता को अरविंद देवांगन समर्थक के रूप में देखा जा रहा है ऐसे में नगर चर्चा से युक्त है की निशा अरविंद देवांगन नपं की सरकार बना रही है, बीजेपी से टिकट की दावेदारी भी शायद इसी मंशा से की गई थी लेकिन यह चर्चा भी तेजी से हो रही है की अरविंद देवांगन बीजेपी के बड़े नेताओं का निवेदन मान सकते हैं और अपना नामांकन वापस ले सकते हैं!
अगर ऐसा स्थिति बनती है तब कौन उम्मीदवार जीत का प्रबल दावेदार होगा इस पर विचार करें तो असमंजस की स्थित है।

बीजेपी ने फिर से अनिल सोनी को अपना चेहरा बनाया हुआ है जिनके कार्यकाल से जनता पूरी तरह से वाकिफ है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से बबलू भाटिया हैं जो पूर्व विधायक अनिता शर्मा के करीबी हैं, बीते पांच वर्ष जनता ने उनका भी कार्यकाल देखा हुआ है और अब बंचते हैं अशोक अमलानी जो निर्दलीय मैदान में हैं और जनता उनका काम भी पहले देख चुकी है, कुलमिलाकर नगर की जनता को सब के बारे में सबकुछ पता है ऐसे में यह निर्णय करना शायद मुस्किल काम नही है की वे वोट किसको दें, रही बात पार्षद प्रत्याशियों की तो इस बार नए उम्मीदवारों की ओर जनता का झुकाव है बदलाव और नए चेहरों की चाह वार्डों में देखी जा रही है।
अब ऊंट किस करवट बैठेगा यह 15 फरवरी को पता चल ही जाना है।

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