छत्तीसगढ़ अभिकर्ता एवम निवेशक कल्याण संघ ने आरंग के पारागांव में बैठक आयोजित कर चिटफंड में डूबे पैसे की वापसी के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलकर सरकार के संकल्प पत्र क्रमांक 35 में उल्लेखित बातों पर ध्यान केंद्रित करने अपील करने की योजना बनाई।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण चंद्राकर सहित सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आशा जताते हुए उल्लेख किया है की मोदी सरकार की गारंटी पर उन्हें पूरा विश्वास है।
बता दें कि पूर्व की भूपेश बघेल सरकार ने भी चिटफंड कंपनियों में डूबे राशि की वापसी की बात कही थी साथ ही चिटफंड कंपनियों द्वारा खरीदी गई जमीनों को राजसात किया था पर प्रभावितों को राशि लौटने में असफल रहे अब जब फिर से बीजेपी की सरकार बन गई है तब संघ ने सरकार पर भरोसा जताते हुएं डूबी राशि की वापसी पर उम्मीद जताई है।
दरअसल रमन सरकार के समय ही प्रदेश में चिटफंड ने पांव जमाया था कई चिटफंड कंपनियों के कार्यालय भी बीजेपी नेताओं ने उद्घाटित किए थे जिसके बाद कांग्रेस ने चिटफंड कंपनियों के साथ मिले होने का आरोप भी भाजपा सरकार पर लगाया था।
छत्तीसगढ़ में चिटफंड का वह दौर लोग अभी भी याद करते हैं जब उन्ही के नाते रिश्तेदार उन्हें पैसा डबल करने की बात कह कर मोटी रकम इन्वेस्ट करा रहे थे पर जब कंपनियां भाग निकली तब अभिकर्ताओं को भी झटका लगा उस समय कई अभिकर्ता दुखी होकर आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए तो कइयों को गांव छोड़कर भागना पड़ा था।
चिटफंड के अभिकर्ताओं ने लगाए बड़े रैंक वालों पर आरोप
गांवों में तब हर गली नई कार नए मोटरसाइकल दौड़ते थे, घरों घर नौजवान बैग लटकाए स्कीम बताते घूमते थे, उनका आरोप है की कई चिटफंड कंपनी के बड़े रैंक में शामिल उनके बॉस उन्हें धोखे में रख कर काम कराए, उनका आरोप है की आज उन्ही लोगों के पास अघोषित संपत्ति है, जिनके पास एक मोटरसाइकल नही थे आज वे महंगी कारें बड़े बंगलों के मालिक हैं, अभिकर्ताओं ने यह भी मांग रखी है की ऐसे लोगों की संपत्ति जांचनी चाहिए और उचित कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए।