रिश्वत मामले में अडानी समूह घिरा, सुप्रीम कोर्ट में भारतीय एजेंसियों से जांच की अपील

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दुनिया के 18वें और भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी के मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

अदालत में एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें गौतम अडानी व ग्रुप के अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के आरोप लगाने वाले केस को पेश करने की मांग की गई है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है।

जांच एजेंसियों द्वारा जांच करने की आवश्यकता

एडवोकेट विशाल तिवारी ने कहा, ‘यूएस न्याय विभाग के आदेश और अमेरिका सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की शिकायत ने अडानी समूह के घूस कांड को उजागर किया है।

आरोप काफी गंभीर है। ऐसे में भारतीय एजेंसियों द्वारा इसकी जांच की जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सेबी ने 3 जनवरी 2024 के सुपीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच पूरी नहीं की है।

सेबी पर भी उठे सवाल

याचिका में मांग की गई है कि सेबी की जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि निवेशकों का विश्वास फिर से बहाल हो सके। बता दें अदालत ने सेबी को आदेश दिया था कि वह अडानी समूह के खिलाफ स्टॉक की कीमतों में हेराफेरी, सिक्योरिटीज कांट्रैक्ट नियमों का उल्लंघन और लेन-देन की जानकारी ना देने के आरोपों की जांच करें।

याचिका में यूएस कोर्ट के अभियोग का हवाला दिया गया है, जिसमें गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और वनीत जैन के खिलाफ रिश्वत देने के आरोप लगाए गए हैं।

अडानी धोखाधड़ी व रिश्वत मामला?

आरोप है कि गौतम अडानी और उनकी कंपनी ने भारत में सौर ऊर्जा का कॉन्टैक्ट पाने के लिए सरकारी अधिकारियों को 26.5 करोड़ डॉलर (करीब 2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। मामले में अडानी समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में जिस सौर ऊर्जा के कांटैक्ट के लिए कथित तौर पर घूस दी गई, उससे 20 वर्ष में दो अरब डॉलर (करीब 16,895 करोड़ रुपये) का मुनाफा होना था। यह केस अडानी ग्रीन एनर्जी और एज्योर पावर से जुड़ा है।

24 अक्टूबर 2024 को न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में केस दर्ज हुआ। यूएस में मामला इसलिए दर्ज हुआ, क्योंकि आरोप है कि रिश्वत की धनराशि के लिए अमेरिका निवेशकों से पैसा जुटाया गया है।

अडानी समूह का केन्या के साथ सौदा रद्द

पिछले माह केन्या में अडानी ग्रुप ने 30 साल के लिए पावर ट्रांसमिशन लाइन बनाने और संचालन का सौदा किया था। केन्या सरकार ने अमेरिकी आरोपों के बाद अडानी समूह के साथ 2.5 अरब डॉलर से अधिक के करार को रद्द कर दिया है। इस पर अडानी ग्रुप ने कहा कि उसने केन्या के एयरपोर्ट को संचालित करने के लिए बाध्यकारी समझौता नहीं किया है।

गिरावट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी

अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोपी बनाए जाने की खबर के बाद अडानी समूह के शेयरों में 23% की गिरावट दर्ज की गई थी। अब सोमवार को अडानी के शेयरों में उछाल देखा गया। बीएसई पर अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों में 6.89%, अडानी ग्रुप एनर्जी में 6.42%, अडानी टोटल गैस में 5.33% और अडानी पोर्टस में 4.64% तेजी आई है।

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