#देश_मरा_हुआ_है?
राजपुताने की गौरवशाली जमीन पर एक नाबालिग बच्ची से गैंगरेप की खबर ने दुनियाभर के मां बाप का सीना छन्नी कर दिया है!
पीड़ित ने दम तोड़ दिया, बताया जा रहा है बेटी का अपना कोई नही था पर देश कहता है हर बेटी देश की बेटी है?
ये देश ही मां भारती की संज्ञा से बेटी है, मां है, बहन है, नारीत्व का बोध कराती है, नारी सम्मान के लिए मरने मिटने वाला यह देश इतना खामोश क्यों है?
किसी रिक्से वाले ने बेटी को होटल में बेच दिया, होटल वाले ने मासूम की शरीर का धंधा किया!
किसानों के इस देश में, मेहनतकश मजदूरों का इतिहास कहने वाले इस देश में किसी बेटी का जिस्म बेचा जा रहा?
सच में इंसानियत ख़फा है हमसे, हम मर क्यों नही जाते या मर चुके हैं सिर्फ शरीर रेंग रहा है?
यह सामने आया न जाने कितने अनजान हैं, कितनी बेटियां दर्द से तड़प कर रोज मर रही हैं इस मरे हुए देश की तरह?
हर दिन जिस्मफरोसों की भूख का निवाला बन रही बेटियों का भविष्य इस देश में क्या हो सकता है?
इंसान के भीतर का हैवान आखिर इतना ताकतवर कैसे होने लगा है, अमानुष की परिभाषा से कहीं ऊंची पहचान बनाने लगा है कलयुग का राक्षस?
यह कोई घटना नहीं, खबर मात्र नहीं, डर है हर उस घर के लिए जिनके आंगन में बेटियों की किलकारियां गूंजती है, हर मां बाप के लिए चौबीसों घंटे का दर्द है जिनकी बेटियां घर की दहलीज से निकलकर देश की बेटी बनती है, पढ़ती है, गढ़ती है!
हे मानव! मानवीयता ही नही अब तुम्हारे परिचय में तो क्यों न इस युग का अंत ही हो जाए?
गजेंद्ररथ गर्व, संपादक -प्रदेशवाद/प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़
