छत्तीसगढ़िया मन के जागरणकाल!
जांगर टोर कमा के खाए पिए जिए के सुख ले वंचित छत्तीसगढ़िया मन के जागरणकाल शुरू होए हे!
एक वक्त आम छत्तीसगढ़िया इस बात से कोसों दूर की उन्हें सत्ता शासन की धुरी भी बनाई जाएगी?
बस अपने खेतों, मजदूरी की जगहों और शोषण की लकीरों में अपनी तकदीरों का रोना ही आया था अब जागरण की बयार उनकी ताकत भरी मियार बन रही है!
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना अब से लगभग एक दशक पहले अस्तित्व में आई और छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता को उच्च करना अपना लक्ष्य बनाया, आज गांव गली छत्तीसगढ़ महतारी वैभव बिखेर रही है।

कौन है छत्तीसगढ़ महतारी?
साक्षात नारी धर्म की धरा है, जन्म से मृत्यु तक जो हमारा भार और पालन पोषण की बीड़ा उठाए, सारे दुख और सुखों में जो ममत्व का पर्याय है, कहीं, मां, बहन, बेटी तो कहीं पत्नी के रूप में ममता की वही अविरल प्रवाह जो हर पौरुष के पुरुषत्व का आधार है!
खुद को खुद का दुश्मन मानने वाला छत्तीसगढ़िया कैसे जागेगा, वह सोया न था बस खोया था अपनी आत्ममुग्धता में, संतोष का चादर ताने अपने खेतों, खलिहानों और गांव ढेरू में अपनो से लड़ता मारता, सिधवई का कलंक पाले अपने भीतर अपने आप को मारता छत्तीसगढ़िया को जब एकाएक अलग राज्य मिल गया तब उसे पता ही नही था वह क्या करे?
नए नवेले मालगुजार को बाहरी सलाहकारों ने खूब लूटा, लूट रहे हैं, नाम के लिए सत्ता हमारी है पर उसके निर्णय हमारे हैं क्या?
अगर होते तो हमारी मां के अंतस में अपने हरे आंचल के तार तार होने का दर्द होता?
अब हमारी मां का दर्द हमारी बेटियां समझ रही हैं और जिस दिन बेटी, मां का बदला लेने हथियार उठाती है, इतिहास बनाती है!
आज मैं महान वीरांगना अवंती बाई लोधी को छत्तीसगढ़ की बेटियों में देख रहा हूं और उनके हाथों में अदृश्य तलवारों को भी!
जय छत्तीसगढ़ महतारी
गजेंद्ररथ गर्व