छत्तीसगढ़ की इन राजनीतिक पार्टियों को निर्वाचन आयोग की नोटिस…जानें क्यों?

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर के उन 345 पंजीकृत लेकिन अप्रमाणित राजनीतिक दलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया आरंभ कर दी है, जो पिछले 6 वर्षों से किसी भी प्रकार के चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए हैं और जिनका कोई सक्रिय कार्यालय अथवा संगठनात्मक गतिविधि अस्तित्व में नहीं है।

छत्तीसगढ़ के कई दल भी जांच के दायरे में
इस कार्रवाई की जद में छत्तीसगढ़ के भी कई ऐसे राजनीतिक दल आए हैं, जो वर्षों से निष्क्रिय हैं। इन दलों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है और उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुनवाई का अवसर दिया जा रहा है। यदि इन दलों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी उनके डीलिस्टिंग की सिफारिश भारत निर्वाचन आयोग को भेजेंगे।

छत्तीसगढ़ के इन दलों को भेजा गया है नोटिस
इस सूची में छत्तीसगढ़ एकता पार्टी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ समाजवादी पार्टी, पृथक बस्तर राज्य पार्टी, राष्ट्रीय आदिवासी बहुजन पार्टी समेत 9 से अधिक दल शामिल हैं। इन दलों के पते और संगठनात्मक गतिविधियां भी जांच में पाई गईं कि या तो अस्तित्व में नहीं हैं या फिर वर्षों से निष्क्रिय हैं।

छत्तीसगढ़ के जिन दलों को भेजा गया है नोटिस:
1, छत्तीसगढ़ एकता पार्टी
पता: 182/2, वार्ड नंबर 08, बड़े पदरमुड़ा रोड, जमगहन, तहसील मालखरौदा, जिला जांजगीर-चांपा
2, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
पता: पोस्ट ऑफिस दल्ली राजहरा, जिला दुर्ग
3, छत्तीसगढ़ समाजवादी पार्टी
पता: रामानुजगंज रोड, संजय पार्क के सामने, अंबिकापुर
4, छत्तीसगढ़ संयुक्त जातीय पार्टी
पता: बजरंग नगर, तात्यापारा वार्ड, रायपुर
5, छत्तीसगढ़ विकास पार्टी
पता: A-12, फ्लैश विहार, न्यू पुरैना, पोस्ट रविग्राम, रायपुर
6, पृथक बस्तर राज्य पार्टी
पता: 8, सीनियर H.I.G., सेक्टर-3, शंकर नगर, रायपुर
7, राष्ट्रीय आदिवासी बहुजन पार्टी
पता: प्लॉट नंबर 4, पुष्पक नगर, जुनवानी रोड, भिलाई, जिला दुर्ग
8, राष्ट्रीय मानव एकता कांग्रेस पार्टी
पता: गुरुद्वारा के पीछे, स्टेशन रोड, रायपुर
9, राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच
पता: प्लॉट नंबर 33/34, लक्ष्मी नगर, रिसाली, भिलाई, जिला दुर्ग
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत की जा रही कार्रवाई
राजनीतिक दलों का पंजीकरण भारत के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत होता है, जिसके अंतर्गत दलों को पंजीकरण के बाद आयकर छूट जैसी कुछ विशेष सुविधाएं भी मिलती हैं। परंतु जब कोई दल वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता और संगठनात्मक रूप से निष्क्रिय पाया जाता है, तो यह पंजीकरण का दुरुपयोग माना जाता है।

फर्जी दलों पर नजर, पारदर्शिता के लिए उठाया गया कदम
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह समीक्षा और कार्रवाई एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। फर्जी या निष्क्रिय दलों को हटाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल सक्रिय और वैध राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न दल ही पंजीकृत रहें।

चुनाव प्रणाली की सफाई और सुधार की दिशा में बड़ा कदम
इस कदम को लोकतंत्र को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आयोग की इस पहल से यह भी सुनिश्चित होगा कि राजनीतिक दलों के पंजीकरण का दुरुपयोग कर वित्तीय लाभ, आयकर छूट या राजनीतिक पहचान जैसी सुविधाएं लेने वाले फर्जी संगठनों पर अंकुश लगाया जा सके।
अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग के पास सुरक्षित
सुनवाई के बाद राज्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा डीलिस्टिंग की सिफारिशें केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेजी जाएंगी, जहां से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह स्पष्ट संकेत है कि निर्वाचन आयोग अब निष्क्रियता और पंजीकरण के नाम पर चल रहे दिखावटी दलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा।

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