रेत खदानों पर कार्रवाई, कालाबाजारी शुरू! रेत की कीमतों में बढ़ोतरी?

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अवैध रेत खनन पर सख्त कार्रवाई, निर्माण कार्यों पर पड़ा व्यापक असर, निर्माण एजेंसियों की बढ़ी लागत

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत राजस्व विभाग एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेत घाट से दर्जनों चैन माउंटेन हाईवा और परिवहन में लगे ट्रैक्टरों को जब्त किया है। यह कार्रवाई जिले में लंबे समय से संचालित अवैध रेत कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

इस अभियान से अवैध रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। विशेषकर वे लोग जो बिना वैध अनुमति के रेत का उत्खनन और परिवहन कर रहे थे, अब प्रशासन की सख्ती के कारण पड़ोसी जिले महासमुंद और रायपुर के अवैध खनिज व्यापारियों पर भी इस सख्ती पर फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
वहां के रेत तस्करों ने अब जिले में कालाबाजारी शुरू कर दी है।
हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में रेत की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे आम नागरिकों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ठेकेदारों ने बताया कि पहले जिले के निकटवर्ती रेत घाटों से 3 हजार रु प्रति हाईवा में रेत की लोडिंग लगती थी, किंतु अब प्रतिबंधित घाटों के कारण उन्हें रेत पड़ोसी जिलों से मंगवानी पड़ रही है, जिससे लागत दोगुनी हो गई है।
पड़ोसी जिले के रेट घाट संचालकों ने रेट के दाम में वृद्धि कर दी है,
वर्तमान में एक हाईवा रेत की लोडिंग लागत ₹6000 से ₹7000 तक पहुंच गई है। साथ ही, अधिक दूरी तय करने के कारण डीजल पर अतिरिक्त व्यय भी हो रहा है।

रेत की कीमतों में इस अप्रत्याशित वृद्धि से मकान निर्माण की लागत में भी तीव्र बढ़ोतरी देखी जा रही है। आम नागरिकों के लिए मकान बनाना अब और अधिक खर्चीला हो गया है। इसके अलावा सीमावर्ती गांवों में भारी मात्रा में रेत का अवैध भंडारण भी देखा गया है, जो पूर्व में नदी से निकालकर एकत्र किया गया था। अब इन्हीं अवैध भंडारों से प्रति ट्रैक्टर रेत उठाकर ऊंचे दामों पर काला बाजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में असंतुलन और निर्माण कार्यों की गति में रुकावट उत्पन्न हो रही है।
स्थल ठेकेदारों ने मांग की है कि मकान निर्माण एवं अन्य शासकीय कार्य हेतु नजदीकी रेट घाटों से रेत लाने की अनुमति मिलनी चाहिए। साथ ही इससे जिले को मिलने वाले राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है।

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