कोरबा: हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए जंगल की अंधाधुंध कटाई के विरोध में न्यायधानी बिलासपुर के समाजसेवी 200 किलोमीटर की पद यात्रा कर सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। बिलासपुर से निकलकर जांजगीर चाम्पा होते हुए आज पदयात्रा कोरबा पहुंची। वही इन पदयात्रियों को जगह-जगह स्थानीय लोगो का जमकर समर्थन भी मिल रहा है कटघोरा के आगे पोंडी उपरोड़ा के नजदीक आते लोग इनका स्वागत कर रहे हैं वही पद यात्रा मे शामिल समाजिक कार्यकर्ता राधे श्याम ने बताया की यात्रा का मुख्य उदेश्य सरकार द्वारा उद्योगपतियों कों लाभ दिलाने के लिए जो पेड़ो की कटाई करवा रही है उसके खिलाफ जनजागरूकता रैली निकाली जा रही है, हसदेव अरण्य मे 8 दिसम्बर कों किसान सम्मेलन है जिसमे वृहद रूप से बड़ा आंदोलन किया जायेगा, उन्हीने कहा की आदिवासी सरकार ही खुद वन पर्यावरण के नियमों का पालन नहीं कर रही है और आदिवासीयों की भूमि अधिग्रहित कर रही है।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने भी किया था आंदोलन!
इससे पहले प्रदेश की गैर राजनीतिक संगठन और उसकी समर्थित राजनीतिक दल JCP ने भी कार रैली और राजधानी में मानव श्रृंखला बना कर हसदेव जंगल बचाने के लिए बड़ा आंदोलन किया था पर शायद इन आंदोलनों से सरकार और छत्तीसगढ़िया मंत्रियों को कोई फर्क नही पड़ता ऐसे में आखिर जनता क्या करे जिससे मध्य भारत के फेफड़े को खत्म होने से बचाया जा सके?
लगभग 10 सालों से आंदोलन कर रहे हैं प्रभावित ग्रामीण
दूसरी ओर हसदेव को लेकर इलाके के ग्रामीण लंबे समय से आंदोलित हैं, छत्तीसगढ़ बचाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में लगातार हसदेव के परसा इलाके में आंदोलन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस के द्वारा प्रताड़ित करने के मामले ख़बरों में आते रहते हैं।
आमजन का इस मामले में सुस्ती सबसे बड़ा खतरा!
बुद्धिजीवियों का मानना है कि जिस तरह से आम जनता इस बात को गंभीरता से नही ले रही, आने वाले दिनों में जिंदगी पर आन पड़ेगी तब समय खत्म हो चुका होगा!