
लक्ष्मी पूजन का महत्व (Significance of Laxmi Pujan)
दिवाली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी (धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी) और भगवान गणेश (बुद्धि और विघ्नहर्ता) की पूजा का विशेष विधान है।
आर्थिक समृद्धि और स्थिरता: ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता, पवित्रता और सच्ची श्रद्धा होती है, वहां उनका आगमन होता है।
नकारात्मकता का नाश: इस पूजन से घर की दरिद्रता, आलस्य और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
ज्ञान और बुद्धि का संतुलन: मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से धन के साथ-साथ सही विवेक और बुद्धि की प्राप्ति होती है, ताकि धन का सदुपयोग हो सके।
लक्ष्मी पूजन की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
1. पूजन की तैयारी (Preparation):
सफाई: दीपावली की सुबह पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और फूलों की माला या आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
स्थान का चयन: पूजा स्थल या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी रखें। चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
स्थापना: चौकी के बीच में थोड़े से चावल रखकर उस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां (या तस्वीर) इस प्रकार रखें कि मां लक्ष्मी गणेश जी के दाहिनी ओर बैठें।
2. संकल्प और पवित्रीकरण (Sankalp & Purification):
पूजा करने वाले व्यक्ति को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
अपने ऊपर और पूजा की सामग्री पर जल छिड़कते हुए तीन बार बोलें:
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
इसके बाद हाथ में जल, अक्षत (चावल) और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें।
3. षोडशोपचार पूजन (Main Worship Steps):
आवाहन: हाथ में फूल लेकर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का आह्वान करें और उन्हें अपने आसन पर विराजमान होने की प्रार्थना करें।
स्नान (अभिषेक): मूर्तियों को जल,चंदन, दूध, दही, घी और शहद के पंचामृत से स्नान कराएं (यदि मूर्तियां धातु या पत्थर की हैं), फिर शुद्ध जल से अभिषेक कर साफ कपड़े से पोछ लें।
वस्त्र व आभूषण: माता लक्ष्मी और गणेश जी को वस्त्र (मौली या नए वस्त्र) अर्पित करें।
तिलक: कुमकुम, हल्दी और अष्टगंध का तिलक लगाएं। चावल (अक्षत) और फूल चढ़ाएं।
धूप-दीप: घी का दीपक और धूपबत्ती प्रज्वलित करें। इसे भगवान को दिखाएं।
नैवेद्य (भोग): मां लक्ष्मी को खीर, बताशे, मिठाई (विशेषकर लड्डू और मखाने), फल और पान-सुपारी का भोग लगाएं।
4. विशेष मंत्र जाप और आरती (Mantras & Aarti):
पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के बीज मंत्र या महालक्ष्मी मंत्र का कम से कम 1 माला (108 बार) जाप करें:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
इसके बाद परिवार सहित खड़े होकर श्रद्धा भाव से श्री गणेश आरती और “जय लक्ष्मी माता…” आरती गाएं।
5. क्षमा प्रार्थना (Prarthana):
पूजा के अंत में भूलचूक के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें:
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥
विशेष टिप: पूजन के बाद घर के हर कोने में (विशेषकर मुख्य द्वार, तिजोरी और रसोईघर में) दीपक जलाएं और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए द्वार खुले रखें।

दीपावली (8 नवंबर 2026) पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
मुख्य लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (गृहस्थों के लिए):
समय: शाम 05:54 बजे से रात 07:50 बजे तक
अवधि: 1 घंटा 56 मिनट
विशेष संयोग: इस समयावधि में प्रदोष काल (शाम 05:31 से रात 08:09 बजे तक) और वृषभ लग्न दोनों काक संयोग बन रहा है, जो व्यापार और घर में धन-धान्य की स्थिरता के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अन्य विशेष मुहूर्त (चौघड़िया एवं काल):
प्रदोष काल (Pradosh Kaal): शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक
निशिता काल (रात्रि कालीन पूजा / Tantric/Special Puja): रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक (9 नवंबर)
सिंह लग्न (मध्यरात्रि): रात 12:25 बजे से प्रातः 02:42 बजे तक (9 नवंबर)
दिन का शुभ चौघड़िया मुहूर्त (यदि दिन में पूजा करनी हो):
चर, लाभ, अमृत (प्रातः काल): सुबह 11:27 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
शुभ (अपराह्न): दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:48 बजे तक
शुभ, अमृत, चर (सायंकाल): शाम 05:31 बजे से रात 10:27 बजे तक।

