TCBT प्राकृतिक पद्धति से मखाना की खेती का भ्रमण एवं अवलोकन
केंद्रीय क्षेत्र की मखाना विकास योजना – राष्ट्रीय मखाना बोर्ड, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित मखाना फसल प्रदर्शन प्रक्षेत्र एवं बीज उत्पादन प्रक्षेत्र का भ्रमण दिनांक 06/10/2026 को किया गया।
संचालक अनुसंधान सेवाएँ डॉ. विवेक त्रिपाठी, नोडल अधिकारी (मखाना) एवं विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम दास साहू, समन्वयक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर तथा विषय वस्तु विशेषज्ञ श्री मनोज साहू डॉ अकान्द धीमर की संयुक्त टीम द्वारा आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह, छटेरा एवं निसदा स्थित TCBT पद्धति से स्थापित मखाना प्रक्षेत्रों का अवलोकन किया गया।

भ्रमण के दौरान TCBT पद्धति से गैर-रासायनिक मखाना उत्पादन, बीज संधारण एवं संरक्षण, ऊर्जा स्वावलंबन हेतु पोर्टेबल बायोगैस संयंत्र, मखाना पैकेजिंग एवं मूल्य संवर्धन इकाई का अवलोकन किया गया। मखाना प्रसंस्करण हेतु बिहार से आए श्री उमेश साहनी से बिहार एवं छत्तीसगढ़ की उत्पादन विधियों में अंतर तथा गुणवत्ता एवं प्रसंस्करण की कठिनाइयों पर चर्चा की गई।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (प्राकृतिक खेती, TCBT पद्धति) श्री ताराचंद बेलजी के अनुसार प्राकृतिक खेती के लिए पंचमहाभूतों – भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर को शुद्ध एवं सजीव करना आवश्यक है। अधिक उत्पादन के लिए इन्हें शक्तिशाली बनाना पड़ेगा। इन पांच तत्वों ने ही इस संपूर्ण प्रकृति का निर्माण किया है।

TCBT के अनुसार इन पंचमहाभूतों को शुद्ध एवं सजीव करने का विज्ञान भारत के प्राचीन कृषि ग्रंथ *वृक्षायुर्वेद* में निहित है। भूमि को शुद्ध करने का अर्थ है भूमि से दुर्गंध को समाप्त करना। दुर्गंध में ही हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं। मिट्टी से दुर्गंध समाप्त होते ही हानिकारक जीवों की इकोलॉजी स्वतः ब्रेक हो जाती है और उनका प्रजनन बंद हो जाता है। मिट्टी में सुगंध बढ़ने पर लाभदायक जीवाणु स्वतः बढ़ने लगते हैं। इसी प्रकार वायु, अग्नि और जल को ठीक करने की सरल तकनीकें TCBT से संभव है। श्री ताराचंद बेल जी के अनुसार टीसीबीटी पद्धति से उत्पादित फसलों का एवं उत्पादों का विक्रय हेतु प्लेटफार्म तैयार कर उपभोक्ताओं को जैविक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे है।

इस अवसर पर श्री प्रीतम, शिव, टीकम, भास्कर, मुकेश सहित अन्य कृषकगण उपस्थित रहे।
