छत्तीसगढ़: क्षेत्रीय दलों का महासम्मेलन 4 अक्टूबर को…प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत…पढ़ें!

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छत्तीसगढ़ में बदलाव की लकीर के लिए तैयार सर्वदलीय नेताओं की टीम लगातार साथ बैठ रहे हैं यह वास्तव में एक बड़ा निर्णय और प्रयास है।

बीते दिनों छत्तीसगढ़ बीजेपी और कांग्रेस ने अपने अपने प्रदेश प्रभारी तय किए, प्रदेश की मीडिया ने जोर शोर से इस पर हल्ला मचाया लेकिन सच में हल्ला मचाने वाली बात यह है कि पहली बार छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय दलों का गठबंधन तैयार हो रहा है!

जिस तन्मयता से स्व.ताराचंद साहू के स्वाभिमान मंच ने क्षेत्रीय राजनीतिक और स्थानीयता को केंद्र बिंदु बनाकर सत्ता तक पहुंचने का व्यूह बनाया आगे चल कर भले ही वह टूट गया लेकिन भावना जस की तस रही जो आगे बढ़ कर प्रादेशिकता स्थापित करने उलगुलान का मशाल जरूर बनी।

छत्तीसगढ़ में शुरू से यह बात कही जाती रही है कि यहां कोई तीसरा मोर्चा जन्म नहीं ले सकता, क्यों नहीं ले सकता अगर अच्छा नेतृत्व और जन समर्थन मिलता है तो जरूर बड़े बदलाव की बुनियाद खड़ी की जा सकती है और यही प्रयास प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना करने जा रही है।

सेना राजनीति में सीधे दखल नहीं देगी लेकिन राजनीति की डगर जरूर तय करेगी!

ज्ञातव्य, सेना से दो राजनीतिक दल JCP और हमर राज पार्टी 2023 से मैदान में हैं और अब प्रदेश में सक्रिय सभी क्षेत्रीय दलों सहित बड़े केंद्रीय दलों का समर्थन प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के लिए काम करेंगे।

महागठबंधन की जरूर क्यों?

छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजनीति में शुरू से ही यह हिम्मत असफल होती रही है कि कोई तीसरा विकल्प तैयार हो सके, राष्ट्रवादी कांग्रेस, स्वाभिमान मंच, जोगी कांग्रेस सफल होते रह गई, प्रयास अच्छा रहा पर जन समर्थन के मामले में कुछ खास नहीं कर पाई और तब आज जैसा माहौल भी नहीं था पर अब राजनीतिक विचारधारा सहित कई मामलों में बड़े बदलाव हो चुके हैं, भाजपा, कांग्रेस की सरकारों को जनता देख चुकी है और इनका सबसे बड़ा घिनौना रूप वनों की कटाई, जमीनों को औद्योगिक घरानों के लिए कौड़ी के भाव देना सहित बड़े घोटालों की लंबी फेहरिस्त है जिससे जनता त्रस्त और तीसरे विकल्प की तलाश कर रही है।

किसी भी प्रदेश में जमीनी बदलाव के लिए राजनीतिक बदलाव जरूरी है, अब जब जनता क्षेत्रीयता और प्रादेशिकता सहित स्थानीय युवाओं के रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर, भाषाई अस्मिता पर अडिग दिखती है तब यह जरूरी है कि एक सर्वसम्मत विचारधारा बने जिस पर सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट किया जा सके और यह काम प्रदेश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक संगठन बखूबी कर रही है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश में यह पहली बार, दिखेगा असर!

राजनीतिक तटस्थता से दूर भावनाओं की राजनीति करने वाले आम छत्तीसगढ़िया नेताओं को सत्ता तक पहुंचने के लिए दिल्ली में बैठे चाणक्यों से जूझना हमेशा महंगा पड़ा है और हर बार दिल्ली वालों ने ठगा, सत्ता पाते ही प्रदेश को चारागाह बनाया, चाहे वह कांग्रेस में भूपेश बघेल सरकार की बात हो या अभी विष्णु देव साय सरकार की बात करें उनकी डोर दिल्ली में बैठे कॉर्पोरेट माफियाओं ने संभाल रखा है, छत्तीसगढ़ की खनिजों पर, भौतिक संसाधनों पर एकक्षत्र राज कर रहे बाहरी बाहुबलियों की सूची प्रदेश में लंबी है वहीं स्थानीय नेता अपने ही लोगों से अपनी असफलताओं के लिए भसेड़े जा रहे हैं।

मैं नहीं तो तू भी नहीं कि भावना से अलग मैं नहीं तो तू सही…का भाव पैदा करेगी महागठबंधन!

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुरू से वैमनस्यता का राज रहा, स्थानीय नेता अपने ही लोगों को काटने बाहर के लोगों को नेता बनाते रहे और राजनीतिक रूप से अपने ही हाथ शोषित होते रहे हैं, यह भावना आज भी बरकरार है, इसका भी बड़ा कारण आपसी मदभेद और एक दूसरे को ताकतवर न बनने देने की लड़ाई रही है।

अब इसी भावना को उल्ट कर राजनीतिक चालबाजी का वक्त है जिसे सफल करने की जुगत एक गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना करने जा रही है।

आने वाली 4 तारीख को राजधानी रायपुर में सभी क्षेत्रीय दलों के मुखिया एक महापंचायत करने जा रहे हैं जिसमें सर्वसम्मति से प्रदेश की राजनीति को मिलकर जनहित सुखाए और हिताय की मंगल माला से छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता की लड़ाई का शंखनाद होगा।

आलेख: गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेश प्रवक्ता CKS, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ

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