18 साल पुराने पोराबाई नकल प्रकरण में फैसला…पढ़ें!

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बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण मामले में 18 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद पोराबाई सहित कुल 4 लोगों को सजा सुनाई है. इन आरोपियों को 5 साल की कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है. यह सजा द्वितीय अपर सत्र के न्यायाधीश जी आर पटेल ने सुनाई है.

क्या है पोराबाई नकल प्रकरण मामला?
वर्ष 2008 में पोराबाई द्वारा हॉयर सेकंडरी परीक्षा बिर्रा के स्कूल में दिलाया गया था, जिसमें पोराबाई को 500 में से 484 अंक प्राप्त कर प्रवीण्य सूची में पहला स्थान प्राप्त किया था. बाद में माध्यमिक शिक्षा मंडल को नकल का शक हुआ है, जिसके बाद जांच कराई गई थी. इस जांच में नकल होना और उत्तरपुस्तिका में हेराफेरी और छेड़छाड़ पाया गया था.


माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जांच में दोषी पाए जाने के बाद बम्हनीडीह थाने में पोराबाई, फूलसिंह नृसिंह, एस एल जाटव, दीपक जाटव के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी. हालांकि 2020 में न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई हुई, जिसमें इन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया.
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा द्वितीय अपील की गई, जिसे स्वीकार कर लिया गया. बता दें कि द्वितीय अपर सत्र में सुनवाई की गई, जहां सभी चारों आरोपियों को 5 वर्ष की कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है.


न्यायाधीश जी आर पटेल ने टिप्पणी देते हुुए कहा कि आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मण्डल के विरुद्ध अपराध नहीं किया, बल्कि उन छात्रों के विरुद्ध भी किया है जो अपनी भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं.

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