रायपुर के खरोरा क्षेत्र में स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री (मारुति फ्रेश) में बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम के मामले में पुलिस ने चार ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन ठेकेदारों ने काम का झांसा देकर नाबालिगों समेत सैकड़ों मजदूरों को बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से रायपुर लाकर बंधक बनाया और 18-18 घंटे तक मशरूम की खेती में जबरन काम कराया।
॥ जुलाई को महिला एवं बाल विकास विभाग ने अन्य विभागों के साथ मिलकर एक संयुक्त कार्रवाई में 97 मजदूरों को रेस्क्यू किया। यह सभी मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के निवासी थे। उनमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे और एक 10 दिन का नवजात शिशु भी शामिल था। रेस्क्यू के बाद बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के आरोपों की पुष्टि हुई।
क्या हैं आरोप?
एफआईआर में चार ठेकेदारों – भोला, विपिन तिवारी, विकास तिवारी और नितेश तिवारी – को आरोपी बनाया गया है।
भोला पर आरोप है कि वह मजदूरों को उत्तर प्रदेश से रायपुर लाया और उन्हें मजदूरी का झांसा देकर बंधक बना लिया।
विपिन, विकास और नितेश तिवारी पर फैक्ट्री में जबरन काम करवाने और मारपीट करने के गंभीर आरोप हैं।
खरोरा पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट के आधार पर अब मामले में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आगे की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
बताते चलें की मोजो मशरूम में ही कुछ साल पहले एक विधवा मजदूर से रेप के मामले में आजतक खरोरा पुलिस के हाथ खाली हैं।
वहीं यह बात भी हजम करने लायक नही की सिर्फ मजदूर ठेकेदार ही मजदूरों के शोषण का जिम्मेदार है, फैक्ट्री प्रबंधन भी इस मामले में दोषी है, कहीं न कहीं इस मामले में प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की मिली भगत है और पूरा अपराध मजदूर ठेकेदार पर मढ कर मालिक साफ बचना चाहते हैं लेकिन प्रदेश की एकमात्र गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना इस मामले में साफ जांच की मांग कर रहा है, अब देखने वाली बात होगी की पुलिस जांच में क्या आता है।
