गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में छात्रों को कथित तौर पर दबाव डालकर नमाज पढ़वाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस गंभीर आरोप के बाद कोटा थाना पुलिस ने प्रोफेसरों और एक छात्र नेता समेत 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें प्रो. दिलीप झा, डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, डॉ. नीरज कुमारी, डॉ. प्रशांत वैष्णव, डॉ. सूर्यभान सिंह, डॉ. बसंत कुमार और छात्र नेता आयुष्मान चौधरी का नाम शामिल है।
मामले के उजागर होते ही भारतीय जनता युवा मोर्चा और अन्य छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रों पर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए दबाव बनाया गया, जो संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच के आधार पर कोटा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जिसे बाद में गहन जांच के लिए कोनी थाने स्थानांतरित कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि एक कार्यक्रम के दौरान उन पर नमाज पढ़ने के लिए दबाव डाला गया। छात्रों ने इस पर विरोध जताया और आरोप लगाया कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। छात्रों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे कि वह इस मामले में निष्पक्ष रुख क्यों नहीं अपना रहा है।
छात्र संगठनों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।
पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। सभी आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधिसम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिलासपुर पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर और आस-पास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है।