खेत बचाओ अभियान: मिट्टी की सेहत बचाने और टिकाऊ खेती अपनाने किसानों को किया जागरूक
बेमेतरा 27.10.2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान , रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा एवं कृषि विभाग के सहयोग से ग्राम अंधियारखोर, विकासखंड नवागढ़ में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत अंधियारखोर के सरपंच भी उपस्थित रहे। एनआईबीएसएम के वैज्ञानिक डॉ. पी. मुवेंथन एवं डॉ. योगेश येले ने किसानों से संवाद किया। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार जोशी एवं श्री डोमन सिंह टेकाम तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व, मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के चयन एवं उपयोग तथा फसलों में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने और फसल उत्पादन की गुणवत्ता एवं स्थिरता बढ़ाने के लिए उर्वरकों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग आवश्यक है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपयुक्त पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
किसान-वैज्ञानिक संवाद में समस्याओं का समाधान
कार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद में किसानों ने खेती से जुड़ी समस्याओं एवं चुनौतियों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी सुझाव दिए। साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, कृषि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा पर्यावरण के अनुकूल खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की पहुंच बढ़ाना, मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा मिला तथा किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन एवं मृदा संरक्षण के लिए उपयोगी तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम में 38 किसानों ने भाग लिया, जिनमें तीन महिला किसान शामिल थीं।

