छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के संस्थापक और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी सुप्रीमो अमित बघेल को जेल में डालना भाजपा के लिए खतरा और छत्तीसगढ़ियावाद के लिए एक अवसर जान पड़ता है!
जिस तरह से लगातार प्रदेश में जल जंगल जमीन की लड़ाई जारी है और इस लड़ाई में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना नेतृत्व करती दिख रही है, ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय राजनीतिक दल जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी को बहुत लाभ होने की स्थिति बन रही है!
प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी और आम छत्तीसगढ़ियों के अधिकारों के लिए गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना डेढ़ दशकों से काम कर रही है और लगातार कारवां बढ़ रहा है, किसी नए प्रदेश के लिए अस्मिता की लड़ाई के लिए यह समय पर्याप्त है और अब शायद वह निर्णायक समय बहुत करीब है जिसका इंतजार छत्तीसगढ़ में मूलभूत राजनीतिक बदलाव के लिए होता रहा है!
अमित बघेल के बयानों को मीडिया या तथाकथित बुद्धिजीवी किसी भी दिशा में मोड़ने की कोशिश करते रहे हों पर आम छत्तीसगढ़िया इस बात से वाकिफ हो चुका है कि मूलतः अमित बघेल और क्रान्ति सेना स्थानीय अस्मिता की बात कर रहे हैं, लगातार बढ़ते औद्योगिकीकरण और परप्रान्ती ताकतों की जो बात अमित बघेल आम छत्तीसगढ़िया को बताना समझाना चाहते थे वह लगभग पूरा हो चुका है।
अब जितने लंबे समय तक सरकार अमित बघेल और प्रदेशवाद कि विचारधारा को कुचलने की कोशिश करेगी आग और भड़केगी जिसका भारी नुकसान बीजेपी को अगले चुनाव में हो सकती है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस जिस चुप्पी से सब कुछ देख कर खामोश है उन्हें भी इसका करार जवाब जनता दे सकती है?
क्या अगले चुनाव में JCP होगी सत्ता की निर्णायक पार्टी?
जिस तरह से जन भावना बन रही है क्षेत्रीय दल पर दांव खेला जा सकता है लेकिन JCP में नेतृत्व की कमी भी साफ झलक रही है, अमित बघेल एक मात्र चेहरा है जिस पर क्रान्ति सेना और JCP का दारोमदार है और वे अभी जेल के बंद हैं अगर लंबे समय तक वे जेल में रहें तो नेतृत्व की कमी के चलते पार्टी लूप लाइन में जा सकती है और चुनाव के समय शायद काफी कमजोर नजर आये, जैसा कि सत्ताधारी पार्टी चाहती भी है और लगातार प्रयास की जा रही है कि अमित बघेल पर कानूनी तलवार लटकी रहे!
निजी फायदे के लिए साथ देने वालों का सुस्त रवैया क्रान्ति सेना को कमजोर कर रही है?
10 साल पहले जिस उद्देश्य से CKS अस्तित्व में आई उसका मूल कुछ बदल सा गया है, लेकिन आज भी क्रान्ति सेना आम जनता की पहली पसंद है और यह स्थित अगर और मजबूत होती है तो इसका पूरा लाभ राजनीतिक विंग JCP को मिल सकता है जिसका पूरा प्रयास संगठन को करना होगा।
अमित बघेल की रिहाई के लिए संगठन को जनता का सहयोग लेना चाहिए, आम सभा कर वास्तविक घटनाओं को जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए आन्दोलन छेड़ी जानी चाहिए!
इसी बहाने लोगों के आक्रोश को सही दिशा देने और राजनीतिक जीत के लिए रणनीतिकार चुनने में भी सहयोग मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषक इस बात के लिये हामी भरते हैं कि यही सही समय है जब छत्तीसगढ़ियावाद को परिभाषित कर जन आक्रोश को राजनीतिक जीत में बदला जा सकता है!
अब देखना होगा कि पार्टी के अन्य प्रमुख जो अमित बघेल के जेल जाने के बाद खुद पर पुलिसिया आंच का डर महसूस कर शांत है वे पार्टी के लिए क्या और कितना कर पाते हैं?
विश्लेषक: गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेशवाद
