कांग्रेस ने नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संदर्भ में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
इस बैठक में प्रत्याशियों के चयन पर चर्चा की गई और कई अहम निर्णय लिए गए। ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटी में प्रत्याशियों के नामों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
टिकट वितरण के फॉर्मूले पर भी चर्चा
बैठक में टिकट वितरण के फॉर्मूले पर भी चर्चा की गई, जिसमें सहमति बनने पर एकल नाम पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) को भेजने का निर्णय लिया गया। अगर सहमति नहीं बन पाई, तो नामों का पैनल तैयार करके भेजा जाएगा।
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रभारी सचिव एस.ए. सम्पत कुमार, सह प्रभारी जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़ जैसे प्रमुख नेता उपस्थित रहे।
कांग्रेस पूरी तरह से चुनावी तैयारियों में जुटी: पीसीसी चीफ
सभी विधायकों ने नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्याशियों के चयन और अन्य चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पीसीसी प्रमुख दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है और जनता का समर्थन पार्टी के साथ रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के प्रभारी और पर्यवेक्षक वार्ड स्तर पर बैठकें कर रहे हैं, और कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
दीपक बैज ने चुनाव परिणामों की घोषणा को लेकर जताई आपत्ति
दीपक बैज ने चुनाव परिणामों की घोषणा को लेकर अपनी आपत्ति भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के कार्यक्रम एक साथ घोषित किए गए हैं, और आचार संहिता भी एक साथ लागू की गई है।
ऐसे में चुनाव परिणामों की घोषणा अलग-अलग तिथियों पर करना उचित नहीं है। निकाय चुनावों के परिणाम 15 फरवरी को घोषित होंगे, जबकि पंचायत चुनावों के परिणाम 18, 21 और 24 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्यों में चुनाव परिणाम एक साथ घोषित होते हैं, तो छत्तीसगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? 9 दिनों का इंतजार कोई बड़ी बात नहीं है।
प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल: बैज
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अधिकांश नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में जीत हासिल की थी।
वर्तमान में प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल है और कांग्रेस को जनता का समर्थन मिलेगा। दीपक बैज ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखने की बात कही, और आवश्यकता पड़ी तो कानूनी सलाह लेकर कोर्ट भी जा सकते हैं।