छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सामाजिक बहिष्कार का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। रतनपुर थाना क्षेत्र के नवागांव मोहदा ग्राम में रहने वाले एक बुजुर्ग संतोष कुमार साहू को सिर्फ इसलिए समाज से बहिष्कृत कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने गांव में आयोजित रामायण कार्यक्रम के लिए चंदा नहीं दिया था।हालत यह है कि पिछले तीन साल से यह बुजुर्ग अपने ही गांव में पूरी तरह अकेला जीवन जीने को मजबूर है।
बात करने पर ₹2500 का जुर्माना
पीड़ित संतोष कुमार साहू के मुताबिक, साल 2023 में गांव में ‘नवधा रामायण’ का आयोजन किया गया था। उस दौरान बेहद खराब आर्थिक तंगी के कारण वे चंदा देने की स्थिति में नहीं थे। चंदा न देने से नाराज होकर ग्रामीणों ने एक बैठक बुलाई और उनके सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुना दिया।
पंचायत ने यह तुगलकी फरमान भी जारी किया कि यदि गांव का कोई भी व्यक्ति संतोष साहू से बातचीत करेगा, तो उस पर ₹2500 का जुर्माना लगाया जाएगा। इस कड़े नियम के डर से अब गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे बात नहीं करता है।
इस सामाजिक बहिष्कार का असर बुजुर्ग की आजीविका पर भी पड़ा है। संतोष साहू ने बताया उनकी कोई संतान नहीं है और उनकी पत्नी भी काफी समय से बीमार चल रही हैं। बहिष्कार के बाद से गांव वालों ने उन्हें खेती-किसानी से रोक दिया है।यहां तक कि उन्हें गांव में कोई मजदूरी का काम भी नहीं दे रहा है, जिससे उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय पुलिस से नहीं मिली मदद, अब कलेक्टर से गुहार
बुजुर्ग का आरोप है कि उन्होंने इस प्रताड़ना के खिलाफ पहले स्थानीय रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। थक-हारकर अब पीड़ित बुजुर्ग न्याय की आस में कलेक्टर और एसएसपी के पास पहुंचे हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उन्हें जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो इस सामाजिक प्रताड़ना से तंग आकर उनके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।फिलहाल, पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
