रात के यही कहीं आठ साढ़े आठ बजे थे, खरोरा में नए थाने के पीछे आफ्ट कॉलेज वाली रोड में इवनिंग वॉक का सिलसिला बहुत पुराना है, हमारी टोली पांच लोगों की थी वॉकिंग कर, आरामिल के सामने वाली नाली के पाट पर बैठ कर गप्पे लड़ा रहे थे, तभी जोर की चीख और धड़ाम की आवाज ने हम पांचों की तंद्रा तोड़ी।
अरे यार ये आवाज कैसी थी, कहां से आई?
वो उधर एक मोटरसाइकल नाले में जा गिरी, कहते हुए हम सभी उधर दौड़े, हे भगवान कहीं कोई अनहोनी न हो देवता!
हम सभी नाले की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, काफी अंधेरा था, मैं और डॉक्टर राम नीचे उतरे कुछ दिख नही रहा था तो मैंने मोबाइल का टॉर्च जलाया, तभी लड़का तपाक से बोला, भैया वीडियो मत बनाना, मेरी बंदी है!
हम दोनों आवक, मदद करने की गरज से आए थे और इनका रवैया?
दरअसल वे एक्सीडेंट से ज्यादा दूसरी बात को लेकर डरे हुए थे, नाबालिग लड़का और लड़की भी यही कोई 13-14 की लग रही थी मुंह पर गमछा लपेटे अंधेरे में छिपी हुई सी सहमी बैठी थी।
बेटा लगा तो नही ज्यादा? मैंने लड़की की ओर टॉर्च घुमाया वह उल्टे मुंह पलटकर खड़ी हो गई, शायद वह मुझे पहचानती हो?
डॉक्टर राम ने भी लड़के को चोंट खरोच की बात पूछी, लड़के ने कुछ नहीं होने की बात कह दी लेकिन चोंट दोनों को गहरी लगी थी, उनकी आवाज से हम समझ गए थे, मैंने एंबुलेंस बुलाने की बात कही तो दोनो डर गए, भैया हम चले जायेंगे प्लीज़ किसी को मत बुलाओ, कहते हुए लड़का गिड़गिड़ाने लगा।
मैंने और राम ने मिलकर बाइक को नाले के नीचे से धक्का देकर ऊपर चढ़ाया जहां हमारे तीन और साथी खड़े थे, उन्होंने ने भी घायलों से मदद के लिए पूछा पर दोनों वहां से टूटी फूटी बाइक पर सवार होकर निकल लिए!
ये पहली बार था जब हम लोगों ने ऐसे जोड़े का सामने से दीदार किया, यूं तो वहां से हर शाम दर्जनों जोड़े बाइक पर फर्राटे मारते निकल जाते हैं और न जाने रात में सुनसान इलाकों की क्या ख़ाक छानते हैं?
डर तो इस बात का ज्यादा है, की कहीं किसी दिन उधर शराबखोरों के हाथ ये जोड़े लग गए तो जरूर अनहोनी हो जानी है।
पुलिस की गस्त सड़कों से घूम जाती है और ये खोपचे में घुसे रहते हैं, ऐसे में इन पर नजर जाना आसान भी नहीं, हां लेकिन नगरवासियों से इस घटना के बाद अपील जरूर करता हूं की अपने नाबालिग बच्चों पर ध्यान रखें!
: गजेंद्ररथ गर्व
