शराब का व्यापार ले डूबेगी सरकार?
बीते सप्ताह भर से नगर पंचायत खरोरा में लगातार शराब बिक्री के खिलाफ बैठकें हो रही है, नगर पंचायत खरोरा की महिला अध्यक्ष सुनीता अनिल सोनी और सभी वार्ड पार्षद तमाम अधिकारी कर्मचारियों और महिला समूहों के साथ बैठक कर नगर में व्याप्त शराब की अवैध बिक्री के खिलाफ लामबंद हो रही है!
मजे की बात यह है की छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है, सांसद, विधायक और तो और नगर पंचायत अध्यक्ष भी बीजेपी की हैं, बीजेपी पार्षदों की मेजोरिटी है और नशा मुक्ति प्रदेश प्रभारी भी खरोरा के ही रहने वाले हैं, यहां तक की बीजेपी महिला मोर्चा ग्रामीण की अध्यक्ष भी खरोरा से ही है!
बताते चलें कि बीजेपी सरकार शराब के खिलाफ ही सत्ता पर काबिज हुई, प्रत्याशी होते हुए विधायक अनुज शर्मा ने सभी वोटरों से यही वादा किया था की गांव गली शराब बिकने नही देंगे और विधायक बनते ही कहा था, शराब कोचिए दूसरा काम तलाश लें!
अब जब उनकी सरकार है, बीजेपी सत्ता पर काबिज है तब वह चाहें तो एक झटके में खरोरा तहसील क्षेत्र को शराब मुक्त कर सकते है तो फिर ऐसे में यह ढकोसला क्यों?
आपको बताते चलें की जब से शराब दुकान खरोरा के भीतर से छडिया पचरी मार्ग पर खुली है, सैकड़ों मौतें नवजवानों की हो चुकी है फिर अवैध शराब बिक्री का लफड़ा अलग!
बताते हैं की प्रशासन, सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सह पर ही तहसील क्षेत्र के गांव गांव शराब बिक्री की दुकानें खुल गई है जहां नाबालिग लड़के स्कूटी पर बोरियों में शराब की बोतल रख कर ढुलाई करते हैं, सबका कमीशन बंधा हुआ है?
आज दो साल सरकार के बीत जाने के बाद कहीं नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवैध शराब बिक्री बंद कराने की याद आई है तो जरूर इसमें भी कोई खेल है?
वर्ना जिस बीजेपी सरकार के ये प्रतिनिधि हैं ऐसे में इनके लिए शराब दुकान बंद कराना बाएं हाथ का खेल है!
अवैध शराब बिक्री, कोचियों की धर पकड़ से अच्छा सीधा सरकार की शराब दुकान ही क्यों न बंद कर दी जाए?
सांसद, विधायक से सवाल करने पर वे कहेंगे अपनी सरकार के खिलाफ कैसे जाएं तो क्या जनता के खिलाफ जा सकते हैं? जनता को चाहिए की अपने जनप्रतिनिधियों के साथ सरकारी शराब दुकान हटाने आंदोलन पर बैठें और अगर उनके चुने जनप्रतिनिधि चाहे वह सांसद, विधायक, नपं अध्यक्ष या पार्षद ही क्यों न हो इस आंदोलन के लिए मना करते हैं तो तुरंत उनके खिलाफ महाअभियोग लगाएं, अब कोई जनप्रतिनिधि पांच साल के लिए कुर्सी का परमानेंट मालिक नही! जनता चाहे तो कुछ भी हो सकता है!
दरअसल, मामला “सबको सब पता है, राजनीति का संसार सजा है” वाली कहावत यहां चरितार्थ हो रही है, खरोरा क्षेत्र की महिलाएं ज्यादातर लहंगा सिलाई का काम करती हैं, आत्मनिर्भरता की मिशाल हैं लेकिन पुरुषों का हाल ऐसा की महतारी वंदन का पैसा भी इनके पीने में पूरे नही पड़ते, इनकी देखासिखी इनके नाबालिग बच्चे भी अब शराब और नशे के आदि हो रहें हैं, पुलिस रिकॉर्ड देखें तो ज्यादातर चाकूबाजी और लड़ाई झगडे के मामले नाबालिग लड़कों के हैं!
ऐसे में अगर अब जनप्रतिनिधि जागे हैं और वार्डवार बैठकें आयोजित हो रही है तो सिर्फ अवैध शराब बिक्री या कोचियों पर कार्रवाई की नही बल्कि मुख्य शराब दुकान को बंद कराने जैसे मुद्दों पर सार्थक पहल होनी चाहिए!
गजेंद्ररथ गर्व, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, संरक्षक प्रेस क्लब खरोरा
सम्पादक, प्रदेशवाद समाचार
