जेल में अमित बघेल और छत्तीसगढ़ियों की एकजुटता!
राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति का खंडित होना, अमित बघेल का आक्रोश, अमर्यादित बयान और देश भर में अमित के खिलाफ FIR दर्ज होना, फरारी घोषित करना, सरेंडर की तारीख तय होना उसी तारीख पर छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता यात्रा और उसी सुबह अमित बघेल की माताजी का स्वर्गवास!
सारे घटनाक्रमों को विस्तार पूर्वक जांचें तो यह असामान्य है?
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना आज से लगभग 10 साल पहले गैर राजनीतिक संगठन के रूप में खड़ी हुई, कुछ नौजवानों ने सरकार की आउटसोर्सिंग के विरोध में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह का पुतला फूंका और यही वह समय था जिसमें तत्कालीन बीजेपी सरकार के लिए आम नौजवान एकजुट हुए!
असंतोष का बुलबुला हर जगह से उठ रहा था, सब अपनी अपनी जगह से इस बात की तैयारी कर रहे थे कि अब बस और नही!
इसी समयकाल में रायपुर के करीब धरसींवा विकासखण्ड के मोहदी ग्राम पंचायत के आस पास लगे उद्योगों में आम ग्रामीण नौजवानों का स्वाभिमान भी चोंटील हो रहा था, जिसकी अगुवाई अभी के CKS प्रदेश संयोजक गिरधर साहू कर रहे थे संयोग की वे तब भी सरपंच रहे और अभी भी सरपंच हैं!
यह वह समय था जब परदेशिया और छत्तीसगढ़िया की बात लोगों की जुबान पर आने शुरू ही हुए थे, धरसींवा विधानसभा से लगातार बने रहे विधायक देवजी के खिलाफ उनके साथी रहे गिरधर साहू और अमित बघेल ने विद्रोह कर दिया था और पहली बार परदेशिया शब्द ने आम जनता को अपनी परिस्थितियों पर विचार करने व्याकुल किया?
गिरधर साहू ने विधायक देवजी की जगह खुद के लिए विधानसभा की टिकट मांगी तब अमित बघेल भी बीजेपी किसान मोर्चा के कद्दावर नेता थे, छत्तीसगढ़ी भाषा में धाराप्रवाह बोलने वाले अमित की पहचान तब भी फायर ब्रांड नेता के रूप में ही थी, बीजेपी के मंचों पर उन्हें सुनने वालों में बीजेपी के पितृ पुरुष स्व.अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम भी शुमार है?
लंबे समय से बीजेपी के कद्दावर नेता रमेश बैस के सानिध्य में पार्टी की सेवा कर रहे अमित बघेल ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी की और जैसा कि आज भी छत्तीसगढ़िया कार्यकर्ता के साथ राष्ट्रीय राजनीतिक दल जो करती रही है, गिरधर साहू और अमित बघेल की इस मांग को बीजेपी ने पार्टी विरोधी बता कर अमित बघेल को पार्टी ने निष्काषित कर दिया, इस आक्रोश में गिरधर साहू भी उनके साथ रहे।
इसी बीच देवी स्पंच में एक हादसे के दौरान बड़ा बवाल हुआ पूरा गांव और सभी आक्रोशित लोग जिन्हें लग गया था कि बाहरी नेताओं के चलते उन्हें अनदेखा किया जा रहा है इस आंदोलन का हिस्सा बने!
यह वही समय था 2014-15 जब एक बड़े बैठक के दौरान भिलाई के सिविक सेंटर में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना अस्तित्व में आई।
बताते हैं की CKS का नामकरण रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यालय में बैठ कर हुई!
मीसाबंदी ठाकुर राम गुलाम सिंह तब सबसे चर्चित और जाने पहचाने चेहरे थे, लंबी लड़ाई शोषण के खिलाफ वे लड़ ही रहे थे, CKS में भी उन्हें सबसे सशक्त मार्गदर्शक के रूप में जगह मिली, तमाम लोग जिन्हें छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया प्रथम का भाव था सभी CKS का हिस्सा बनें, उसी समयकाल में स्व. ताराचंद साहू की पार्टी स्वाभिमान मंच में टूट ने उनके छत्तीसगढ़ियावादी नेताओं को CKS की ओर खींचा, आज CKS के प्रदेश अध्यक्ष अजय यादव तब के स्वाभिमान मंच राजनीतिक दल का हिस्सा थे और इस तरह सभी असंतुष्टों ने मिलकर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना गैर राजनीतिक संगठन का पौधा रोपा!
रास्ता लंबा था लड़ाई बड़ी और इसी बीच देवी स्पंच के आंदोलन ने तीनों बड़े चेहरों दादा ठाकुर, गिरधर साहू और अमित बघेल जो तब के सबसे युवा चेहरे थे को जेल की काल कोठरी में धकेल दिया गया, कई महीनों की जेल के दौरान संगठन कछुवा चाल में आगे बढ़ रही थी।
जैसा की आम गरीब छत्तीसगढ़िया अपनी रोजी रोटी की दिनचर्या से उबर नही पाते और दूसरी आम मानसिकता की छत्तीसगढ़ियों को एक करना मेढ़क तौल जैसा कठिन काम है जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है!
क्योंकि CKS युवाओं की टीम थी लगातार नौजवान इस संगठन को पानी दे रहे थे, अब तो पढ़े लिखे बुद्धजीवी भी इस संगठन का हिस्सा बन रहे थे और इस तरह CKS से तमाम छत्तीसगढ़िया कवि, लेखक, पत्रकार, साहित्यिक और शासकीय कर्मचारी भी जुड़ने लगे थे।
2018-19 के आते आते लगभग रायपुर जिला और विकासखंड CKS की सदस्यता के लिए तैयार था, इसी बीच छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता के लिए बूढ़ा देव यात्रा की रणनीति बनी, राजधानी रायपुर के बूढ़ा तरिया में 71 फिट ऊंची कांसा की मूर्ति बनाने संकल्पित CKS के संयोजन में सेनानियों ने कांसा दान महाअभियान की दो यात्राएं की और प्रदेशभर से कांसा तांबा पीतल के बर्तन दान स्वरूप लिए गए, इस बीच सेनानियों का उत्साह चरम पर था, बिना संसाधन, बिना किसी केंद्रीय मदद स्वस्फूर्त, सेनानियों की छोटी टोलियां गांव गांव घूम रही थी।
इस महाआयोजन की आहुति में एक सेनानी को अपनी जान भी देनी पड़ी, भाटापारा बलौदा बाजार जिले के यदु परिवार ने इस मुहिम में एक दुर्घटना के चलते जवाबदार बेटा खो दिया, CKS के लिए यह बड़ा आघात था।
राजधानी रायपुर का बूढ़ा तालाब स्टेडियम एक शानदार कार्यक्रम का साक्षी बना, इसी दिन CKS सेनानियों ने मिलकर पहली बार राजधानी में चेतराई तिहार मनाया और अपने पुरखों की आत्मा को जगाकर आशीर्वाद लिया, इस दिन से जैसे पूरा माहौल बदल गया लगातार संघर्ष करती सेना को जीत की उम्मीद दिखी, इसी मंच से प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने राजनीतिक पार्टी निर्माण की अपील हुई, यूं लग रहा था मानों पुरखों ने आसमान से खूब आशीष बरसाई और एक अनजाने सफर के लिए सब साथ होते गए लेकिन जेसीपी के निर्माण के पहले ही आदिवासी समाज जो शुरू से CKS को समर्थन कर रहे थे ने अपनी अलग राजनीतिक दल हमर राज पार्टी बना ली और चुनावी घोषणा भी कर दी गई!
तब CKS सेनानियों को समझ ही नही आया की जब एक राजनीतिक दल बन ही गई थी तब दूसरी पार्टी और बनाने की क्या जरूरत थी, क्यों हमर राज पार्टी को स्वीकार्यता नही मिली?
2023-24 चुनावी साल था, राजनीतिक दल बनाने उधेड़ बुन चल रहा था पर किसी को कोई ज्यादा जानकारी नहीं थी, कुछ लोगों को अभी भी शंका थी, जागरूकता और तटस्थता की लड़ाई अभी लंबी है कहते हुए आखिर चुनावी घोषणा के 14 दिन पहले एक बड़े पगबंधी जोहार कार्यक्रम में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की घोषणा हुई, सभी तन्मयता से जुटे थे, आम छत्तीसगढ़िया राजनीतिक दांवपेच से अनजान, भावनाओं की गहराई से बिना संसाधन और सुविधा सत्ता का जंग जीतने निकल चुके थे!
आखिर CKS से निकली दोनों क्षेत्रीय राजनीतिक दलों हमर राज पार्टी और JCP की जमानत जप्त हुई पर राजनीति का ज्ञान इस समय काल ने खूब सिखाया, यही वह समय भी था जब निश्छल निष्काम और बिना पद प्रतिष्ठा की लालसा से जुड़े CKS सेनानियों और राजनीतिक पाखंड का कॉकटेल बना जो सेना के लिए बड़ा कड़वा अनुभव रहा, CKS के कुछ सेनानियों को राजनीति रंगने में कामयाब हुई और कुछ यहीं तक चल कर राजनीतिक दल से अलग हो गए!
यह वही समय था जब CKS में दो अलग राह बनी, एक वे जो जेसीपी के लिए थे और एक वह जो सिर्फ गैर राजनीतिक विचार धारा में बह रहे थे!
इस दो फाड़ में एक रहस्य भी था, असल विवाद क्या था कुछ लोगों को छोड़ सबको भ्रम और अफवाह ही पता है! दरअसल किसी भी संगठन को चलाने के लिए अर्थ बहुत जरूरी होता हैं और सेना के पास इसकी कमी हमेशा रही, गरीब शोषित वर्ग ही सेना की रीढ़ रहे ऐसे में अर्थ एक बड़ी समस्या थी, इस बीच कोरबा जिला विवादों का जिला बना कारण कोयला का व्यापार रहा शायद, इसी कोयले ने कांग्रेस सरकार को मालामाल किया था!
ऐसी चर्चा दबे जुबान होती की CKS को भी कोरबा से ही अर्थ का आश्वासन है?
इस जिले की टीम का प्रदेश टीम में दबदबा और प्राथमिकता देख कर ही समझ आता था की कमाऊ पूत यहीं से हैं?
CKS में दो फाड़ की समरकथा इसी कोरबा से शुरू हुई लेकिन यह भी सच था की जितने भी जिलों में CKS की टीम अस्तित्व में थी सभी आर्थिक तंगी का शिकार थे, इस पर छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति स्थापना का निर्णय, सैकड़ों जगह महतारी अस्मिता के लिए मूर्ति स्थापना हुई और शायद यही CKS में दुर्भावना की शुरुआत का कारण बना, जिले के जिम्मेदारों ने अपने खर्चे से आयोजन किए और कर्ज में फंस गए, प्रदेश टीम ने यह कह कर पल्ला झाड़ दिया की यह तुम लोगों की जिम्मेदारी थी तुम जानों?
जबकि इन आयोजनों से मंच प्रदेश के बड़े चेहरों को मिला और एक बड़ी पहचान उनकी बनती चली गई, दूसरी ओर काना फूसी और पद पाने की लालसा से जुड़े लोगों ने भी CKS को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी, सीधे प्रदेश नेतृत्व से मिलकर प्रभावित करने अपनी ताकत बताने जताने का दौर भी चला और इस तरह CKS में दो धड़ों का निर्माण हो गया!
इससे पहले भी बहुत सारे सेनानियों ने जिनका ताल्लुक संस्थापना के समय से रहा था जिनमें भिलाई और रायपुर के नौजवान शामिल थे उन्होंने सेना छोड़ी थी और अब सारे असंतोषियों ने दूसरे धड़े को समर्थन दे दिया।
दूसरे धड़े का मुखिया कोरबा के दिलीप मिरी बनाए गए और संरक्षक की भूमिका में CKS संस्थापक सदस्य रहे चिरपरिचित ठाकुर राम गुलाम सिंह ने रायपुर जिले की कमान तेजतर्रार धीरेंद्र साहू के साथ संभाली।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना की पहचान आम छत्तीसगढ़ियों के अधिकार के लिए लड़ने वाली संगठन के रूप में ही रही पर अब राजनीतिक दल JCP भी हर जगह मौजूद रहने लगी ऐसी स्थिति में वे सेनानी जिनका मोह अन्य दलों से था वे अलग हो गए या कार्यक्रमों से दूरी बना ली, उनका मानना रहा की अब CKS के आयोजन राजनीतिक हो चले हैं, संबोधन और कार्यशैली भी सत्ता की लालसा से लबरेज होने के चलते भी गैर राजनीतिक मुहिम को झटका लगा।
अब जब राजनीतिक दल जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल हेट स्पीच मामले में पुलिसिया कार्रवाई झेल रहें हैं ऐसे में CKS के दूसरे धड़े ने भी उसका भरपूर साथ दिया और शायद यह एक नए अध्याय के शुरू होने जैसा संकेत है!
दादा ठाकुर राम गुलाम सिंह का अमित बघेल को लेकर लगातार बयान आते रहे हैं अमित को अपना साथी बताना, छत्तीसगढ़ियावाद पर एक विचार और व्यवहार चर्चा का विषय है।
बीते दिनों अमित बघेल की माताजी के दशगात्र कार्यक्रम में पहुंचे ठाकुर राम गुलाम का भाउक करने वाला वक्तव्य और प्रदेशवासियों को एकजुट होने की अपील CKS के दोनों धड़ों के सेनानियों का बड़ी संख्या में पथरी पहुंचना छत्तीसगढ़िया वाद की विचारधारा के लिए शुभ संकेत है!
लेखक: गजेंद्ररथ गर्व, CKS के पूर्व अध्यक्ष रायपुर जिला ग्रामीण, पूर्व प्रदेश कार्यकारणी JCP रहे हैं और लगातार प्रदेशवादी विचारधारा के अग्रणी विचारक हैं, वर्तमान में छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में पत्रकारिता और राजनीतिक विश्लेषणकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, देश में उनकी पहचान एक फिल्म लेखक, निर्माता निर्देशक के रूप में है।
