छत्तीसगढ़ियावाद: छत्तीसगढ़ में मुखर होती अस्मिता की आवाज!

Date:

छत्तीसगढ़ में मुखर होती अस्मिता की आवाज!

किसी भी प्रदेश की जनता को अपने अस्तित्व की लड़ाई का भान तब होता है जब कोई बड़ा आघात उनके परिचय पर पड़ता है!
राजधानी में छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति खंडित होना और अमित बघेल का अमर्यादित होना, इन दोनों घटनाओं के बीच द्वंद है अस्मिता के खतरे का?

प्रदेश की गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना लगातार बीते एक दशक से प्रादेशिक प्रतिमानों की लड़ाई लड़ रहा है, प्रदेश की राजधानी में जिस तेजी से प्रादेशिक अस्मिता को लूटने का खुला खेल जारी है को बंद करने, आम छत्तीसगढ़िया समाज को जगाने और अपने मूल को पकड़े रखने इस संगठन ने कभी हरेली रैली, पुरखा सुरता, लाठी रैली, जबर जोहार, गोहार जैसे कितने ही आंदोलन किए!
कांसा दान महाअभियान इस कड़ी में एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक आयोजन रहा जिसके माध्यम से राजधानी में पहली बार चेतरई मनाया गया यह बड़ा संदेश था इस प्रदेश में बुढ़ादेव जागरण का!

प्रकृति पूजक यह प्रदेश लंबे समय से सांस्कृतिक अतिक्रमण झेल रहा है और सरकारें वोट बैंक की राजनीति के चलते छत्तीसगढ़ को मिनी इंडिया का टैग लगा रही, ठीक है सभी जाति धर्म समुदाय और भिन्न प्रांत के लोग लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं लेकिन हमारे ही पुरखों ने कहा है जैसा देश वैसा वेश, तो फिर इस प्रदेश के लिए परप्रांतियों में अलग भाव क्यों?

किसी बुद्धजीवी ने सवाल उठाया कि इस प्रदेश में आदिवासी समाज को छोड़ सभी परप्रान्ती हैं, किसी के पुरखे 5 सौं साल तो किसी के 2 सौ साल पहले आये हैं?
ऐसे में वो कौन लोग हैं जो हर विशिष्ट पर्व, तिथि पर अपने मूल राज्य जाने की बात करते हैं?
तेली, कुर्मी, नाई, धोबी, ढीमर, सतनामी, कलार, मरार आदि सच बताएं कि क्या उनका कोई पुरखौती प्रदेश है जहां आज भी वे जाते हों, उनका कोई परिचय अन्य प्रान्त में जिंदा हो? उन्हें याद भी नही शायद की वो कहीं से आये भी हैं, पर ये कौन लोग हैं जो बात बात पर हमारे यहां ऐसा, हमारे यहां वैसा, बोल के आम छत्तीसगढ़िया को हीनभाव से भर कर खुश होता है, वहीं कहीं पलट कर उन्हें कोई कह दे कि जब तुम्हारे यहां इतनी ही सुविधा, सभ्यता है तो यहां क्यों रह रहे हो, फिर मत पूछो, हमें परदेशिया कह रहें हैं? विलाप शुरू!!

सेना ने आपको परदेशिया की संज्ञा दी क्योंकि! आप तब हमारे साथ नही थे जब इस प्रदेश के मूल और सांस्कृतिक पहचान से खिलवाड़ किया जा रहा था, क्यों हमारे पुरखों का तेलीबांधा, मरीन ड्राइव हो गया? ये सिर्फ उदाहरण मात्र है प्रदेश भर में इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हैं जिसका प्रतिकार सेना ने किया और करता रहेगा, क्योंकि यह प्रदेश ही हमारा परिचय है इसके सिवा कोई और अस्मिता हमारी हम सब छत्तीसगढ़ियों की नही है, इसे बचाने के लिए सरकारों को जीतने बार भी बदलना पड़े हम बदलेंगे!
अमित बघेल रोया था पहली बार क्यों? जिसने अपने पिता को अभी 2 महीने पहले खोने पर एक आंसू नही बहाया, प्रकृति के नियम को स्वीकार किया! पर जब प्रकृति शक्ति की जीवंत देवी जिसे हर प्रदेशवासी महतारी पुकारता हो और उसका सर धड़ से अलग दिखे, कौन नही खौलेगा?

अमित बघेल ने आपत्तिजनक कुछ कहा है? तो मैं उनके आपत्तिजनक शब्दों का समर्थन कतई नही करता, अगर हमारी महतारी का अपमान हुआ है तो औरों के आस्था पर चोंट का हिजगा बिल्कुल गलत है!
बल्कि अब हम सभी लोगों को जिनकी आस्था छत्तीसगढ़ महतारी से जुड़ी है एक जुट हों, अपने नदी तालाबों, आस्था स्थलों पुरखों के सम्मान के लिए एक मंच पर आएं… क्योंकि हम सब छत्तीसगढ़िया हैं।
गजेंद्ररथ ‘गर्व’
PRADESHVAD.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

More like this
Related

भिलाई स्टील प्लांट: हादसों के बाद अधिकारियों पर गाज!

भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं...

नवा रायपुर: अखिल भारतीय DGP-IG कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन की बैठक शुरू…

नवा रायपुर में चल रहा 60वां अखिल भारतीय DGP-IG...

छात्र को पेड़ से लटकाने का मामला, स्कूल की मान्यता रद्द, संचालक पर FIR!

सूरजपुर जिले के निजी स्कूल में KG-2 के छात्र...

छत्तीसगढ़ी के लिए जल्द ही सत्याग्रह: नंदकिशोर शुक्ला

छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिसव पर रैली और संगोष्ठी सामाजिक उदासीनता और...