चुप्पी आपके अस्तित्व के लिए खतरनाक हो सकती है: जयदास
छत्तीसगढ़ के लोग दिल से बड़े, व्यवहार से सरल और स्वभाव से इतने सीधे होते हैं कि यहाँ लोग हर चीज़ को सहने की आदत में ढल चुके हैं। कोई जंगल काट देता है लोग सिर्फ़ देखते रह जाते हैं। कोई नया टैक्स लगा देता है तो लोग सोचते हैं कि शायद सरकार की कुछ मजबूरी होगी। कोई नया क़ानून आ जाए, गाँव-गाँव, शहर-शहर तक असर दिखे फिर भी यहाँ कोई आवाज़ नहीं उठती। मानो यहाँ समझदारी इतनी बढ़ गई है कि अब आवाज़ उठाना ही बंद हो गया है।
लेकिन अरे भाई! इतना भी समझदार बनने की ज़रूरत नहीं है कि आपकी चुप्पी ही आपकी कमजोरी बन जाए। आज 25 साल हो गए छत्तीसगढ़ बने हुए।
इतने सालों में विकास के नाम पर हम कहाँ खड़े हैं, इसका मूल्यांकन करने की ज़रूरत है।
क्या हम सच में आगे बढ़े हैं? क्या गाँवों में रोजगार बढ़ा है? क्या किसानों का कर्जा कम हुआ है या और बढ़ गया? क्या शिक्षा और स्वास्थ्य मजबूत हुए हैं या आज भी लोग रायपुर, बिलासपुर भागने को मजबूर हैं? खनिज संपत्ति से भरे प्रदेश में क्या जनता का हिस्सा मिला भी या सिर्फ़ बड़े घरानों की तिजोरियाँ भरीं?
कभी-कभी चुप्पी भी अपराध बन जाती है। लोकतंत्र में आवाज़ उठाना ज़रूरी है तकलीफ़ हो तो कहना, अन्याय हो तो सवाल करना, और गलत हो तो विरोध करना सीखिए। नहीं तो इतिहास लिखेगा छत्तीसगढ़ सोता रहा, और विकास के नाम पर सिर्फ़ वादे जागते रहे।
जयदास मानिकपुरी की कलम से…सौजन्य फेसबुक
