वाद पर विवाद!
छत्तीसगढ़ की तासीर विवाद की नही पर बात अस्मिता की हो तो कोई भी भड़क जाए!
जेसीपी सुप्रीमों ने जो कहा, कतई जायज नहीं कहा जा सकता?
इस बात से पनपा विवाद इस छोटे से छत्तीसगढ़ के बाहर कई प्रदेशों में मसला बन गया!
कुछ तो गड़बड़ है!
गड़बड़ क्या है ऐसा तर्क लगाएं!!
कहीं यूं तो नही के सरकार के लिए आगे चलकर ब्रेकर बनने वाली पार्टी को उसके मुखिया सहित सांप्रदायिक करार देने की जुगत कर भीतर खाने कुछ पक रहा हो?
बीजेपी सरकार जनता के मन से उतर रही है, यूं कहें राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को नापसंदगी का शिकार भी होना पड़ सकता है?
ऐसे में क्या करें, क्या न करें, ये कैसी मुश्किल हाय!!
कौन है जो छत्तीसगढ़ियों के सपने में आकर, जगा कर, सपने दिखा रही?
CKS की विंग JCP?
छत्तीसगढ़िया राज की संकल्पना साकार होने की पूरी उम्मीद!
जनता एक जुट हो ऐसा माहौल और इस माहौल को सांप्रदायिक रंग देना बहुत आसान?
ठीक है, मूर्ति खंडित हुई, जवाबदार कौन?
सिंधी, मारवाड़ी समाज कहां से आए इस मसले पर? भगवान झूलेलाल, अग्रसेन की एंट्री ने बिगाड़ दिया दांव?
भगवान पर अमर्यादित टिप्पणी का आरोप तो माफी मांगने में क्या सोचना, भगवान हैं, ईश्वर, मां बाप के पांव में सर रखना तरक्की का रास्ता है!
अंततः अपनी वाणी पर संयम रख कर ही राजनीति का रास्ता पार किया जा सकता है, हमारे देश के सभी संत, महात्मा हमारे प्रेरणा स्रोत हैं उनका सम्मान ही हमारा गौरव!

मेरी राय में क्योंकि जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी राजनीति के रास्ते सत्ता का सफर करने निकली है तो अपनी गलती पर जो भले ही हमें गलती न लगे पर किसी की भावनाएं आहत तो हुई हैं? जताया जाए खेद!
स्वाभिमान नही मरता संतों के सम्मान से, उच्च होता है सदन गुरुओं के आशीर्वाद से…जय छत्तीसगढ़ जय हिंद
गजेंद्ररथ गर्व, पत्रकार
