एनआईबीएसएम के विद्यार्थियों ने केवीके रायपुर में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया
रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को कृषि की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, रायपुर के बी.एससी. कृषि अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर में पाँच सप्ताह का ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ तथा किसानों से सीधे संवाद कर खेत स्तर की समस्याओं और कृषि संबंधी चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए के कृषि विज्ञान केंद्र प्रमुख डॉ. गौतम रॉय ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों तथा व्यावहारिक कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण के दौरान किए गए क्षेत्रीय कार्यों, किसानों के साथ संवाद तथा स्थानीय स्तर पर कृषि पद्धतियों एवं समस्याओं से प्राप्त अनुभवों को साझा किया। उनकी प्रस्तुतियों ने कृषि शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व तथा किसानों की आवश्यकताओं को समझकर समस्याओं के समाधान खोजने की उपयोगिता को रेखांकित किया।
डॉ. विनोद वाशनिक एवं डॉ. ललित खरबिकर नोडल अधिकारी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अनुभव भावी कृषि पेशेवरों में व्यावसायिक दक्षता, व्यावहारिक कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक, आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान ने अपने संबोधन में RAWE प्रशिक्षण को सैद्धांतिक ज्ञान और वास्तविक कृषि परिस्थितियों के बीच की दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा खेत स्तर पर अपनाए जा रहे नवाचारों का अनुभव विद्यार्थियों को कृषि प्रणालियों और किसानों की आवश्यकताओं की गहरी समझ प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समर्पण, धैर्य और निरंतर प्रयास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. शर्मा ने कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा, रोजगार तथा उद्यमिता सहित उपलब्ध विविध करियर अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से उभरते अवसरों का लाभ उठाने तथा कृषि नवाचार को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने और किसानों की आजीविका में सुधार के लिए अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
पाँच सप्ताह के प्रशिक्षण का सफल समापन सक्षम, आत्मविश्वासी और क्षेत्रीय परिस्थितियों की समझ रखने वाले भावी कृषि पेशेवरों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऐसे प्रशिक्षण से विद्यार्थी कृषि की जमीनी चुनौतियों को समझकर सतत कृषि विकास और किसान कल्याण में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार होते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वाती पारधी ने किया।

