मोदी की गारंटी लागू कराने हुई छत्तीसगढ़ी समाज, साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकरों और छात्र नेताओं की बैठक, 28 को राजधानी में बड़ा आयोजन
रायपुर । सोमवार को राजधानी में छत्तीसगढ़ी समाज के नेताओं, साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
बैठक में मातृभाषा में शिक्षा(मोदी की गारंटी) को अभी तक छत्तीसगढ़ में लागू नहीं किये जाने पर चर्चा हुई. दरअसल नई शिक्षा नीति-2020 के तहत मातृभाषा में अनिवार्य रूप से प्राथमिक शिक्षा दिए जाने का प्रावधान किया गया है. लेकिन दुर्भाग्य से प्रदेश में यह कानून अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सका है. जबकि राजभाषा छत्तीसगढ़ी में शिक्षा की मांग लगातर उठती रही है।

वहीं राज्य बनने के 25 वर्ष बाद और राजभाषा विधेयक पास होने के 18 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ी अभी तक सरकारी कामकाज की भाषा भी नहीं बन सकी है।
यहाँ यह भी तथ्य महत्वपूर्ण है कि छत्तीसगढ़ी की पढ़ाई विश्वविद्यालय में एमए डिग्री के साथ कराई जा रही है, लेकिन स्कूली शिक्षा में यह लागू नहीं है।
इन विषयों के संबंध मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के बैनर तले छत्तीसगढ़ीभाषी लोग कई बार सरकार के प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं. वहीं समय-समय पर चर्चा-परिचर्चा-संगोष्ठी और पदयात्रा के सामाजिक जागरण का काम भी करते रहे हैं।

अब इसी कड़ी में एक बड़ा आयोजन और जुड़ाव राजधानी रायपुर में 28 नवंबर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस को होने जा रहा है. प्रदेश भर से समाज प्रमुख, साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार, शिक्षक, छात्र और अन्य लोग इसमें शामिल होंगे. कार्यक्रम का आयोजन कलेक्ट्रेट चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर वंदना, माल्यार्पण के साथ होगा. आयोजन में बड़ी से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
इसी कड़ी में राजभाषा मंच के प्रांतीय संरक्षक नंदकिशोर शुक्ल और छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ गर्व ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में लंबी पदयात्रा कर राजनेताओं से छत्तीसगढ़ी राजभाषा में राजकाज की शुरुआत और प्राथमिक शिक्षा माध्यम बनाने गुहार लगाई थी जिस पर प्रदेश भर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

