बिसमत मेहतरू! की कहानी, गजेंद्ररथ की जुबानी!

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बिसमत मेहतरू! की कहानी, गजेंद्ररथ की जुबानी!

ये नाम और इन नामों से जुड़े व्यंग्य आप पढ़ते रहते हैं आज आप लोगों को इन नामों और चेहरों के पीछे की कहानी सुनाता हूं…
बात यही कोई साल 2015- 16 की है, सरकार को बोनस तिहार के लिए एक विज्ञापन चाहिए था, शैलेंद्र धर दीवान मेरे बड़े भाई छत्तीसगढ़ के बेस्ट वीडियो एडिटर को यह काम संवाद से मिला था उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट के लिए संपर्क किया और मैंने लिख दिया, अब शूट करना था कलाकार भी चाहिए पर बजट नही था, मैंने खरोरा के कुछ साथियों को तौरी फौरी में एक्टिंग सिखाई और खरोरा के ताला तालाब खार नाली पार में शूटिंग शुरू कर दी।


ज्यादा संवाद किसान के थे भाव भंगिमा भी किसान के हिस्से में था सो किसान का किरदार मैंने खुद किया और अपने खास साथी मुन्ना भैया (दिनेश यादव) को दूसरी मुख्य भूमिका में रखा जो आपको रेडियो के साथ बैठे दिखते हैं, हाथ में डंडा लिए परेशान किसान मैं बना!
अब कैरेक्टर को नाम देना था तो मैंने मुन्ना भैया को मेहतरु बना दिया और मैं खुद बिसमत, लेकिन संवाद अदायगी में मैंने मुन्ना भैया को उधो कह दिया था!

अच्छा हां इसमें मुन्ना भैया का वाइस ओवर शैलेंद्र भैया ने किया है…सुनिए

शैलेंद्र भैया ने पूछा यही नाम क्यों?
दरअसल ये नाम असल जिंदगी के कैरेक्टर हैं मेरे ननिहाल सिरपुर खंडसा में मेरे मामा के पड़ोस में मेहतरू मामा रहते हैं उनका कैरेक्टर मैंने पूरा उठा लिए अब बिसमत तो यह नाम मेरा प्रिय नाम है मेरे नाना के दोस्त बिसमत ध्रुव जी जो अब देवता हो चुके हैं पर हमेशा मेरे व्यंग्य में जिंदा हैं!

यही नाम बिसमत मैंने अपनी फिल्म तोला ले जहूं उढ़रिया में सतीश जैन जी के कैरेक्टर को दिया था। फिल्म की कहानी, स्क्रीन प्ले और संवाद मैंने लिखे थे, निर्देशन शैलेंद्र धर दीवान का था और निर्माता नवीन टाटिया जी और देवेंद्र पांडे जी थे, यह फिल्म अपनी अनोखी संवाद अदायगी के लिए तब खूब चर्चा में रही, फिल्म में सतीश जैन जी का एक ही सीन है पर यादगार!

देखिए वीडियो…

हां तो मैं बता रहा था की रमन सरकार के लिए बोनस का एड बना रहे थे परेशान किसान खेत बेचने नपाई करा रहा था तभी मेहतरू हाथ में रेडियो लिए पहुंचता है, गाना बज रहा होता है, मोर संग चलव जी…!!
बिसमत कका कर्ज का रोना रोते हैं तभी रेडियो में मुख्यमंत्री की आवाज गूंजती है, जल्द ही बोनस देंगे और बिसमत खुश हो जाता है!
37 सेकंड के इस एड में किसान की पीड़ा थी आखिर में यह एड सेलेक्ट नही हुआ और बस!

बिसमत और मेहतरू मेरे दिल के बहुत करीबी जीवंत कैरेक्टर हैं, कोई भी फिल्म लेखक ऐसे ही वास्तविक जिंदगी से नाम और कहानियां उठाता है, मेरी लगभग सारी कहानियों में जो मैंने वास्तविक जीवन और कैरेक्टर पर लिखा है सभी जीवन की वास्तविकता को परिभाषित करते दिखते हैं, अब सोंच रहा हूं कहानियों, स्क्रिप्ट और फिल्म मेकिंग पर कोई कार्यशाला शुरू करूं ताकि आज की पीढ़ी को अच्छी कहानियों और फिल्मों के लिए तैयार किया जा सके!

गजेंद्ररथ गर्व, FTII
फिल्म लेखक, निर्माता, निर्देशक 9827909433

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