‘छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना’ छत्तीसगढ़ियावाद की एक मजबूत विचारधारा!

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छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना”
छत्तीसगढ़ियावाद की एक मजबूत विचारधारा!

वर्ष 2000 छत्तीसगढ़ को स्वतंत्र राज्य का दर्जा तो मिल गया लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था की इस पहचान के लिए कोई लड़ाई नहीं लड़ी गई हो!

छत्तीसगढ भातृ संघ ने इस पहचान के लिए कई बलिदान दिए लेकिन तब छत्तीसगढ़ की आवाज दिल्ली तो छोड़िए भोपाल तक भी नहीं पहुंच पाती थी!
छत्तीसगढ़िया नेताओं ने एड़ी चोटी लगाई पर यह मामला राजनीति से जुड़ा था, तब बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों ने रत्नगर्भा छत्तीसगढ़ को टटोला नही था!

आखिर राजनीतिक वायदे ने ही सही, छत्तीसगढ़ को अलग परिचय दिया और शुरू हुई अपनी ही जमीन पर आम छत्तीसगढ़ियों के स्वाभिमान की लंबी लड़ाई!
हालात ठीक वैसे ही जैसे भारत की आज़ादी, छत्तीसगढ़ आज भी अपनी सांस्कृतिक आजादी के लिए लड़ रही है!

वर्ष 2014 में रमन सिंह की सरकार ने आउटसोर्सिंग के दरवाजे खोल दिए, हर छोटी बड़ी भर्ती अब परप्रांत से पूरी होने लगी, छत्तीसगढ़ के युवाओं में गुस्सा चरम पर था, रायपुर और भिलाई के नौजवानों ने मुख्यमंत्री से भेंट की और आउटसोर्सिंग नीति का विरोध किया पर सरकार ने उनकी बातें अनसुनी कर दी।
ठीक इसी समय काल में औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा मोहदी गांव के देवी स्पंज आयरन में स्थानीय मजदूरों ने बाहरीवाद के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, राजधानी के नौजवान और औद्योगिक क्षेत्र के कामगारों की ताकत एक हो गई और इसी आंदोलन ने जन्म दिया छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना को और एक मजबूत विचारधारा बनी छत्तीसगढ़ियावाद की!

वर्ष 2015 में इस आंदोलन ने छत्तीसगढ़िया समाज को एक उद्देश्य दिया छत्तीसगढ़िया राज स्थापित करने का, छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया प्रथम का, और निकल पड़े लाखों नौजवान इस महाआंदोलन में जो आज भी अनवरत जारी है अपने लोगों के लिए, छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के लिए!

देवी स्पंज की लड़ाई ने तीन आम छत्तीसगढ़ियों को संघर्ष की भट्टी में तपाकर खास बनाया जिनमें पहला नाम है दादा ठाकुर रामगुलाम सिंह, निडर निष्पक्ष और महतारी अस्मिता के योद्धा, दूसरा नाम गिरधर साहू, राजनीति, कूटनीति के महागुरु और तीसरे युवा आइकॉन अमित बघेल, जिसके बेहिचक, बेबाक और दमदार बोल ने तमाम छत्तीसगढ़िया नौजवानों के रगों में छत्तीसगढ़ियावाद का उबाल भर दिया।
इन तीनों ने 90 दिनों की जेल काटी और कसम खाई अपनी छत्तीसगढ़ महतारी को परप्रांतवाद की बेड़ियों से मुक्त कराएंगे।

प्रदेशभर के युवाओं को आह्वान हुआ और सेना बनती चली गई, जिन छत्तीसगढ़ियों का कोई सुनने वाला नहीं था अब उनकी ओर से लड़ने वाली सेना बन चुकी थी, जहां भी किसी स्थानीय के साथ कोई शोषण होता सेना पहुंचती, लड़ती और इस तरह बड़ा संदेश प्रदेशवासियों तक पहुंचने लगा, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना है न!

सेना ने पुरखों के ध्येय वाक्य को अपना स्लोगन बनाया, जात पात के करो बिदाई, छत्तीसगढ़िया भाई भाई, इस वाक्य में एक जुटता और ताकत का अहसास था और इस अहसास ने पूरे प्रदेश को एक धागे में पिरोना शुरू किया।

“छत्तीसगढ़ियावाद” इस एक विचारधारा ने तमाम छत्तीसगढ़ियों के भीतर स्वाभिमान भर दिया, हमारी मिट्टी, नदियां, जंगल, खनिज और हम ही याचक?
नही अब इन परिस्थितियों को बदलना होगा, हमारी पहचान, हमारे अस्तित्व को स्थापित करने के लिए ही तो यह पृथक राज्य छत्तीसगढ़ हमें मिला है, लेकिन क्या ऐसा हो पाया है, क्या हमारी संस्कृति, भाषा और साहित्य अपनी अलग पहचान बना पाई अब तक?

आज लगभग दस साल यानी एक दशक की उम्र हो चली है छत्तीसगढ़ियावाद की इस लड़ाई को, अब बहुत कुछ बदल चुका है, छत्तीसगढ़ महतारी का मान हो रहा है, अपमान पर प्रदेश उबलता भी है, अमित बघेल अभी भी जेल में बंद हैं, अब इस गैर राजनीतिक संगठन का एक राजनीतिक विंग भी है जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी जिसके केंद्रीय अध्यक्ष है अमित बघेल।
दादा ठाकुर रामगुलाम और गिरधर साहू अभी भी CKs में सक्रियता से स्थानीयता की लड़ाई लड़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना एक विचारधारा है, छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया प्रथम इसका उद्देश्य है यह किसी परिचय का मोहताज नहीं, किसी चेहरे का किताब नहीं और न ही किन्ही खास लोगों के लिए लाभ का समुच्चय है!

आज CKs हर उस पीड़ित वर्ग का मजबूत साथी है जिनके साथ अन्याय हुआ, हो रहा है।
किसी भी शोषित पीड़ित ने जब भी छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना को आवाज लगाई है, निःस्वार्थ सेना ने सहयोग किया और लड़ाई लड़ी है, यह क्रम छत्तीसगढ़िया राज की स्थापना तक और इसके बाद भी अनवरत जारी रहने वाला है।
चेहरे बदलेंगे, तरीका बदलेगा पर विचारधारा कभी नहीं बदलेगी।

आलेख:
गजेंद्ररथ गर्व
प्रदेश अध्यक्ष – छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़
प्रदेश प्रवक्ता व मुख्य सलाहकार – छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, गैर राजनीतिक संगठन
प्रवक्ता – छत्तीसगढ़ फिल्म एसोसियेशन
9827909433

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